New Delhi. टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश तेज कर दी है और इसके लिए तीन प्रमुख कॉरपोरेट दिग्गजों -टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) टी वी नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक एवं समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल, और एनएसई के एमडी एवं सीईओ आशीष चौहान के नाम उभरकर सामने आए हैं। मामले से परिचित लोगों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार, जहां आंतरिक उम्मीदवारों में नरेंद्रन सबसे आगे चल रहे हैं, वहीं अग्रवाल भी अपने निवेश बैंकिंग और पूंजी आवंटन अनुभव के साथ दौड़ में बने हुए हैं। दूसरी ओर, भारत के पूंजी बाजारों के दिग्गज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के संस्थापक अधिकारियों में से एक चौहान इस दौड़ में अप्रत्याशित दावेदार साबित हो सकते हैं।
चयन प्रक्रिया अभी जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अगला चेयरमैन चुनने में टाटा संस के बोर्ड और होल्डिंग कंपनी को नियंत्रित करने वाले ट्रस्टों की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने छांटे गए उम्मीदवारों के नाम शीर्ष सरकारी नेतृत्व को बता दिए हैं और नामों पर गहन विचार-विमर्श के बाद फैसला होने की संभावना है। टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस ने इस बारे में टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
चंद्रशेखरन, जिन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और वर्तमान में अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, ने पिछले महीने घोषणा की थी कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने पर वह पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे।
हालांकि उत्तराधिकारी खोजने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी छांटे गए नाम की पुष्टि नहीं की गई है। सामने आए अन्य नामों में स्वयं नोएल टाटा भी शामिल हैं, जो समिति द्वारा समय पर प्रक्रिया पूरी न कर पाने की स्थिति में अंतरिम चेयरमैन के रूप में कार्य कर सकते हैं। इनके अलावा टाटा संस की समूह मुख्य डिजिटल अधिकारी आरती सुब्रमण्यन, टाटा मोटर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शैलेश चंद्र और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा के नाम भी चर्चा में आए हैं।
मामले से परिचित लोगों के अनुसार चौहान एक चौंकाने वाली पसंद हो सकते हैं। नरेंद्रन अपने साथ टाटा का लंबा अनुभव लाते हैं और शीर्ष पद के लिए स्वाभाविक आंतरिक दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन उनका करियर लगभग पूरी तरह से टाटा स्टील के भीतर रहा है, और होल्डिंग-कंपनी स्तर तथा पूंजी आवंटन में उनका अनुभव अपेक्षाकृत कम है।
दूसरी ओर, चौहान का प्रोफाइल बिल्कुल अलग है। एनएसई प्रमुख के पास प्रौद्योगिकी, पूंजी बाजार, वित्तीय सेवाओं और संस्था निर्माण का गहरा अनुभव है। वह 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना में मदद करने वाले अधिकारियों में शामिल थे और बाद में 2022 में एनएसई प्रमुख के रूप में लौटने से पहले उन्होंने बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के एमडी और सीईओ के रूप में कार्य किया।
आईआईटी मुंबई से स्नातक और आईआईएम कलकत्ता से स्नातकोत्तर प्रबंधन की डिग्री रखने वाले चौहान ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम किया है। वर्तमान में वह एनएसई के 30,000 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का नेतृत्व कर रहे हैं, जो अब तक के भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इसके साथ ही एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये हो जाएगा और यह बाजार पूंजीकरण के हिसाब से 10 सबसे मूल्यवान भारतीय कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
नरेंद्रन का नाम चर्चा में आने की ये है वजह...
मुश्किल दौर में शानदार परफॉर्मेंसः नरेंद्रन ने जब पद संभाला, तब टाटा स्टील भारी कर्ज, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगे विदेशी अधिग्रहणों से जूझ रही थी। उन्होंने कर्ज कम करने, कैश फ्लो सुधारने और डोमेस्टिक पोजीशन मजबूत करने पर काम किया। यूके और नीदरलैंड्स में कठिन रीस्ट्रक्चरिंग फैसलों को भी संभाला।
टाटा कल्चर की गहरी समझः 2016 के सायरस मिस्त्री विवाद के बाद, टाटा ग्रुप अपनी पुरानी परंपराओं, मूल्यों और समूह के साथ जुड़ाव को बनाए रखने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है। चंद्रशेखरन की तरह, नरेंद्रन भी लगभग 4 दशक से टाटा ग्रुप का हिस्सा रहे हैं और इसकी कार्यशैली और सिद्धांतों को गहराई से समझते हैं।
ऑपरेशन्स का अनुभवः चेयरमैन पद केवल रोजमर्रा के काम संभालने का नहीं, बल्कि कैपिटल एलोकेटर और रणनीतिकार का होता है। ग्रुप ऐतिहासिक रूप से ऐसे लीडर्स को तरजीह देता है।




