Ranchi. झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के अपराधी निशार हसन को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उसके खिलाफ झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2002 (जेसीसीए) के तहत जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक हिरासत) के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उसकी आपराधिक रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने पर्याप्त संतुष्टि के बाद याचिकाकर्ता को असामाजिक तत्व मानते हुए हिरासत का आदेश पारित किया था। उसके खिलाफ छह आपराधिक मामले व 10 सनहा दर्ज हैं। जमानत मिलने से हिरासत का आदेश अवैध नहीं है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसके खिलाफ दर्ज सभी छह आपराधिक मामलों में उसे नियमित जमानत मिल चुकी है। फिर भी उसके खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश जारी किया गया, जो सक्षम प्राधिकारी के स्वतंत्र विवेक का इस्तेमाल किए बिना पारित किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा, सिर्फ इस आधार पर कि याचिकाकर्ता को छह आपराधिक मामलों में जमानत मिल चुकी है, निवारक हिरासत का आदेश स्वतः अवैध नहीं हो जाता।
जेल से गिरोह चलाने का आरोप
सरकार ने दावा किया कि जेल में रहकर भी वह अपने सहयोगियों के जरिये संगठित आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था। सरकार ने आशंका जताई कि जेल से बाहर आने पर उसकी गतिविधियों से इलाके में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती है।



