पटना. बिहार की प्रतिभा ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया है. मधुबनी जिले के मूल निवासी और 1993 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विनयतोष मिश्रा ने ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक (DGP) का पदभार संभाल लिया है. उनके इस शीर्ष पद पर आसीन होने से उनके पैतृक गांव से लेकर ओडिशा के कटक शहर तक जश्न का माहौल है.
पारिवारिक विरासत से मिली शिक्षा की प्रेरणा
3 नवंबर 1966 को जन्मे विनयतोष मिश्रा का पारिवारिक परिवेश शुरू से ही शिक्षा और पांडित्य से समृद्ध रहा. उनके दादा स्वर्गीय बल्लू मिश्रा, पिता डॉ. लेखनाथ मिश्रा और नाना विद्वान स्वर्गीय विष्णुलाल झा शास्त्री की विरासत ने उन्हें सदैव अध्ययन के प्रति प्रेरित किया. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता प्राप्त की और 1993 में ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी बने.
तीन दशकों के कार्यकाल में मिले कई राष्ट्रीय सम्मान
विगत तीन दशकों की पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और प्रशासनिक दक्षता की गहरी छाप छोड़ी. उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया गया:
- वर्ष 2009: सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक
- वर्ष 2016: उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस पदक
- वर्ष 2017: आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन के लिए आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक
- क्राइम ब्रांच से शीर्ष पद तक का सफर और भावी प्राथमिकताएं
डीजीपी बनने से पूर्व वे क्राइम ब्रांच (सीआईडी) के महानिदेशक पद पर कार्यरत थे. 16 अगस्त को वाईबी खुरानिया के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राज्य पुलिस की कमान संभाली. पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने राज्य में महिला सुरक्षा, नशा मुक्ति और साइबर अपराधों पर सख्त नकेल कसने को अपनी मुख्य प्राथमिकता बताया.
गांव और ननिहाल में मिठाइयां बांटकर मनाया गया जश्न
उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर उनके पैतृक गांव पौना (रहिका) और ननिहाल ठाढ़ी (अंधराठाढ़ी) में ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी. परिजनों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का उनका यह सफर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है.


