राष्ट्रीय गीत का अपमान करने पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है.
नई दिल्ली. राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् बिल को मंगलवार, 11 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है. अब यह कानून बन गया है. अब इस गीत का अपमान करना अपराध माना जाएगा. लोकसभा और राज्यसभा ‘वंदे मातरम् बिल’ को पहले ही मंजूरी दे चुकी है.
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंतिम स्वीकृति मिल गई है. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून देशभर में तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है. इस नए कानून के तहत अब ‘वंदे मातरम्’ को वही कानूनी सुरक्षा और संवैधानिक दर्जा प्राप्त होगा, जो अब तक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हासिल था.
नए कानून के तहत सख्त प्रावधान और सजा
गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, नए संशोधनों के तहत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालना, इसे गाने से किसी को रोकना, या इसके गायन के समय किसी भी प्रकार का असम्मान प्रदर्शित करना अब एक गैर-जमानती और दंडनीय अपराध माना जाएगा.
सजा और जुर्माना: राष्ट्रीय गीत का अपमान करने पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है.
दोबारा अपराध करने पर कठोर कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति दोबारा या बार-बार इस अपराध को दोहराता है, तो उसके लिए कम से कम एक साल की अनिवार्य जेल का कड़ा प्रावधान किया गया है.
पुराने कानून यानी ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को रोकने के कड़े नियम थे, लेकिन राष्ट्रीय गीत के लिए ऐसा कोई स्पष्ट विधायी ढांचा मौजूद नहीं था. इस नए कानून ने उस विधिक कमी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है.
राष्ट्रगान के बराबर मिला दर्जा और नया प्रोटोकॉल
संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को यह घोषणा की थी कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित गीत ‘वंदे मातरम्’, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, को ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मान और दर्जा दिया जाएगा. इस संशोधन के जरिए लगभग सात दशकों बाद उस ऐतिहासिक संकल्प को पूर्ण कानूनी स्वरूप प्रदान किया गया है.
इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत के मान-सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल और निर्देश जारी किए हैं:
आधिकारिक कार्यक्रमों में प्राथमिकता: राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के संबोधन जैसे सभी सरकारी एवं आधिकारिक आयोजनों में यदि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों बजाए जाते हैं, तो राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ पहले गाया या बजाया जाएगा.
समयावधि और पद: इन आधिकारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह पद गाए जाएंगे, जिसकी कुल निर्धारित समयावधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी.
सावधान की मुद्रा अनिवार्य: जिस भी सभा या आयोजन में राष्ट्रगीत गाया या बजाया जा रहा हो, वहां मौजूद सभी नागरिकों को सम्मानपूर्वक ‘सावधान’ (अटेंशन) की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य होगा.
स्कूलों में दैनिक गायन: देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों और स्कूलों में दिन की शुरुआत अनिवार्य रूप से राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से की जाएगी.
स्वतंत्रता दिवस पर दिखेगा ऐतिहासिक बदलाव
इस नए कानून के लागू होने के बाद, आने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले की प्राचीर से पहली बार आधिकारिक तौर पर पूरे गरिमामय वातावरण में ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा. सरकार के इस सख्त रुख से यह साफ संदेश गया है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत की गरिमा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.


