New Delhi. सुप्रीम कोर्ट 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर यानी व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क) लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा. यूपीआई भुगतान लगभग छह वर्ष तक पूरी तरह नि:शुल्क था. सरकार ने 15 अक्टूबर से यूपीआई मंच के जरिये व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया है.
हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले रोजमर्रा के लेनदेन और छोटी राशि के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. इसके माध्यम से 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी.
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी सामग्री जैसे आवश्यक सेवाओं तथा कम लाभ वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का निश्चित एमडीआर लगेगा. उच्चतम न्यायालय की 28 सितंबर की वाद सूची के अनुसार, अधिवक्ता अंजन दत्ता की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी.


