यूनियन चुनाव से पहले अंदरूनी ध्रुवीकरण तेज होता दिख रहा है. बोनस समझौता अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आने वाले चुनाव की राजनीति में इसे नेतृत्व की उपलब्धि के तौर पर पेश करने की तैयारी भी नजर आ रही है.
जमशेदपुर. टाटा वर्कर्स यूनियन की सोमवार को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में हुई कमेटी मीटिंग ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर सतह पर ला दिया. बैठक के दौरान अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू के खिलाफ तीखी नाराजगी सामने आने की चर्चा रही. माहौल इतना गरम हुआ कि बहस कथित तौर पर गाली-गलौज, धक्कामुक्की और धमकी तक पहुंच गई. हालांकि, इसी दौरान बड़ी संख्या में कमेटी मेंबर अध्यक्ष के पक्ष में भी खड़े नजर आए.
बैठक समाप्त होने के कुछ ही समय बाद यूनियन की अंदरूनी राजनीति का दूसरा अध्याय शुरू हो गया. टुन्नू चौधरी ने बिष्टुपुर स्थित अपने आवासीय कार्यालय में कमेटी मेंबरों की बैठक बुलाकर अपनी ताकत परखने की कोशिश की. विभागवार कमेटी मेंबरों से संपर्क किया गया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से कार्यालय पहुंचने का आग्रह किया गया. जुटान हुआ, लेकिन संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. बताया जा रहा है कि कुल कमेटी मेंबरों की संख्या के मुकाबले आधे से भी कम लोग वहां पहुंचे.
माइकल जॉन में टकराव, बिष्टुपुर में शक्ति परीक्षण के बाद टुन्नू के सामने खुलने लगे यूनियन के सियासी पत्ते
कमेटी मीटिंग के हंगामे के बाद अध्यक्ष की सक्रियता ने बढ़ाई हलचल, आधे से कम मेंबरों की मौजूदगी ने खड़े किए कई सवाल
इस बैठक ने ऑफिस बेयरर्स के बीच बने राजनीतिक समीकरणों को भी काफी हद तक स्पष्ट कर दिया. टुन्नू के साथ डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजीव चौधरी, संजय सिंह और सहायक सचिव अजय चौधरी दिखाई दिए. दूसरी ओर महामंत्री सतीश सिंह पहले से ही अध्यक्ष पद को लेकर चुनौती की स्थिति में हैं. शाहनवाज आलम, आमोद दुबे, संजीव तिवारी, नितेश राज और श्याम बाबू जैसे पदाधिकारी इस जुटान से दूर रहे.
दिलचस्प पहलू यह रहा कि कमेटी मीटिंग में वेज समझौते पर विस्तार से बोलने से अध्यक्ष ने परहेज किया, लेकिन आवासीय कार्यालय की बैठक में वेतन समझौते को अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हित में परिस्थितियों के अनुरूप जो बेहतर विकल्प था, वही उन्होंने चुना. साथ ही दावा किया कि अगले दो-तीन दिनों में सालाना बोनस समझौता होने की संभावना है.
बैठक में अध्यक्ष का निशाना खास तौर पर महामंत्री सतीश सिंह रहे. टुन्नू ने आरोप लगाया कि कुछ लोग समझौते के समय साथ रहते हैं, लेकिन बाद में कर्मचारियों को अलग संदेश देकर भ्रमित करते हैं. उन्होंने ऐसे लोगों से कर्मचारियों को सतर्क रहने की अपील की.
समर्थक पदाधिकारियों ने भी अध्यक्ष के नेतृत्व और पिछले समझौतों का बचाव किया. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि वेज वार्ता की प्रगति से यूनियन पदाधिकारियों को लगातार अवगत कराया जाता रहा है. संजय सिंह ने टुन्नू के कार्यकाल में हुए समझौतों को बेहतर बताया. राजीव चौधरी ने ईसीबीएस में पदोन्नति से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं है. अजय चौधरी ने भी मौजूदा नेतृत्व को कर्मचारियों के लिए बेहतर विकल्प बताया.
बैठक के दौरान टुन्नू ने यह भी बताया कि अजय चौधरी और संजय सिंह का मुंबई-गोवा दौरा रद्द कराया गया है, क्योंकि आगामी बोनस समझौते में दोनों की मौजूदगी आवश्यक होगी.
पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश यही है कि यूनियन चुनाव से पहले अंदरूनी ध्रुवीकरण तेज होता दिख रहा है. बोनस समझौता अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आने वाले चुनाव की राजनीति में इसे नेतृत्व की उपलब्धि के तौर पर पेश करने की तैयारी भी नजर आ रही है.
उल्लेखनीय है कि आर. रवि प्रसाद के कार्यकाल में बने बोनस फॉर्मूले के आधार पर ही अब तक सालाना बोनस समझौते होते रहे हैं. ऐसे में आगामी समझौते में नया क्या होगा और उसका श्रेय किसे मिलेगा, यह यूनियन की भावी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण सवाल होगा. प्रबंध निदेशक टी.वी. नरेंद्रन के जमशेदपुर में मौजूद होने के बीच बोनस पर सहमति बनाने की कोशिशें तेज होना भी इसी राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है.




