लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की हालिया बैठक में कुल 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लग गई है. भले ही इन्हें प्रशासनिक और विकासात्मक फैसले बताया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इन घोषणाओं को आसन्न विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की गई एक सोची-समझी चुनावी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. सत्ताधारी दल की नजरें स्पष्ट रूप से उन तमाम सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर हैं जो राज्य की सियासत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ को इस चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा केंद्रबिंदु माना जा सकता है. इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सभी बसों में आजीवन नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी जाएगी, जिससे सीधे तौर पर एक करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है.
चुनाव से ठीक पहले बुजुर्ग माताओं और महिलाओं को साधने का यह दांव राजनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा ने अपने पिछले संकल्प पत्र में भी इस वादे को प्रमुखता से रखा था. अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सरकार इस वादे को धरातल पर उतारकर महिला मतदाताओं के बड़े वर्ग को अपने पाले में मजबूत करने की पुरजोर कोशिश कर रही है.
इसके साथ ही, गंगा एक्सप्रेसवे को बिजनौर से हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिस पर लगभग 10,761 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना से दो प्रमुख कुंभ नगरियों प्रयागराज और हरिद्वार के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित हो जाएगा. चुनाव के मुहाने पर खड़े राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने वाले ऐसे प्रोजेक्ट्स का समय पर आना महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह जनता के बीच सरकार की विकासात्मक और सांस्कृतिक छवि को धार देने की रणनीति का हिस्सा है.
बेरोजगारी और औद्योगिक विकास के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप 272.25 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) विकसित करने का निर्णय लिया है. चुनाव के दौरान विपक्ष अक्सर रोजगार और औद्योगिक विकास के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करता है, ऐसे में इस तरह के औद्योगिक गलियारे युवाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को जिंदा रखने का कड़ा संदेश देते हैं.
कुल मिलाकर, योगी कैबिनेट के ये प्रस्ताव इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आगामी चुनावों की वैतरणी पार करने के लिए सत्ता पक्ष ने हर वर्ग चाहे वह महिलाएं हों, युवा हों या फिर धार्मिक-क्षेत्रीय भावनाएं को साधने का पूरा खाका तैयार कर लिया है. चुनाव के लिहाज से इन योजनाओं का असर राजनीतिक रूप से कितना प्रभावी साबित होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सरकार ने अपनी चुनावी जमीन को मजबूत करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.





