पटना. बिहार सरकार ने राज्य में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य स्तर को सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा की है. 3 साल में 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार, CM सम्राट ने बताया पूरा प्लान के तहत, राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर 1 करोड़ महिलाओं को सीधे रोज़गार और स्वरोज़गार से जोड़ना है.
‘अनीमिया मुक्त बिहार’ और स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसका लक्ष्य लगभग 1.20 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँच बनाना है. इसके तहत बच्चों, महिलाओं और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में खून की कमी की जाँच कर दवाएँ और ज़रूरी इलाज मुहैया कराया जाएगा. साथ ही, जिला स्तर पर 36 तरह के ऑपरेशन की सुविधा विकसित की जा रही है ताकि ग्रामीणों को पटना के चक्कर न लगाने पड़े.
डेयरी क्षेत्र और ‘सुधा सखी’ से स्वरोज़गार
बिहार में 1.81 करोड़ से अधिक महिलाएँ ‘जीविका’ समूह से जुड़ी हैं. डेयरी sector में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार उन्हें ‘सुधा सखी’, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध संग्रहण केंद्रों से जोड़ रही है.
हर पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र: लॉटरी के माध्यम से महिलाओं का चयन कर प्रत्येक पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र खोला जाएगा. इसके लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ के तहत लाभार्थियों को ₹60,000 की वित्तीय सहायता दी जा रही है.
पशु औषधि केंद्र: राज्य के सभी 534 प्रखंडों में पशु दवा बिक्री केंद्र खुलेंगे, जिनका संचालन महिलाएँ करेंगी.
दुग्ध उत्पादन लक्ष्य: वर्तमान में 12 लाख दुग्ध उत्पादक किसानों को बढ़ाकर 50 लाख करने और डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 80% तक पहुँचाने का लक्ष्य है.
सामाजिक व शैक्षणिक प्रोत्साहन योजनाएँ
अंतरजातीय विवाह सहायता: अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग की पात्र महिलाओं को अंतरजातीय विवाह पर बिहार सरकार (₹1.25 लाख) और केंद्र सरकार (₹1.25 लाख) की ओर से कुल ₹2.50 लाख दिए जाएंगे.
छात्रों के लिए प्रोत्साहन: विभिन्न प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाली सभी वर्गों की छात्राओं को ₹30,000 से ₹1,00,000 तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
राजनीतिक भागीदारी: त्रिस्तरीय पंचायत और नगर निकायों में 50% आरक्षण की बदौलत वर्तमान में लगभग 59 से 60 प्रतिशत प्रतिनिधि महिलाएँ चुनी गई हैं.
यह बहुआयामी रणनीति बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.




