नई दिल्ली. मीडिया मुगल और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्र के खिलाफ चल रहे व्यक्तिगत दिवालिया मामलों (Personal Insolvency Proceedings) में एक नया और दिलचस्प कानूनी मोड़ आ गया है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में तीसरे सदस्य की राय अन्य दो सदस्यों से अलग होने के कारण, पुनर्भुगतान योजना (Repayment Plan) को मंजूरी देने वाला कोई भी बहुमत का फैसला (Majority Verdict) सामने नहीं आ पाया है.
यह घटनाक्रम उस रिपोर्ट के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया था कि NCLT ने ज़ी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्र के व्यक्तिगत दिवालिया पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है. इसके तहत उन्हें 22,006.57 करोड़ रुपये के लेनदारों के दावों को मात्र 6.5 करोड़ रुपये में निपटाने की अनुमति मिलने की बात कही गई थी. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया कि चूंकि तीसरे सदस्य की असहमति के चलते कोई स्पष्ट बहुमत नहीं बना, इसलिए इस चरण में कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता. इस मामले को अब NCLT के अध्यक्ष के पास वापस भेज दिया गया था.
5 सदस्यीय स्पेशल बेंच का गठन
इन घटनाक्रमों और कानूनी पेचीदगियों के मद्देनजर, NCLT ने इस मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष 5 सदस्यीय बेंच का गठन किया है. NCLT स्पेशल बेंच, नई दिल्ली, कोर्ट नंबर II ने कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत NCLT अध्यक्ष को भेजे गए नए संदर्भ के बाद 31 अगस्त 2026 को यह आदेश पारित किया.
नए आदेश के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई अब NCLT अध्यक्ष के साथ-साथ न्यायिक सदस्यों (Judicial Members) बचु वेंकट बलराम दास, महेंद्र खंडेलवाल और तकनीकी सदस्यों (Technical Members) अतुल चतुर्वेदी तथा रवींद्र चतुर्वेदी की पांच सदस्यीय बेंच करेगी. ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि इस बेंच का गठन पूरी तरह से कानून सम्मत प्रक्रिया के तहत किया गया है.
सुभाष चंद्र के व्यक्तिगत दिवालिया और कर्ज के इस बड़े मामले पर वित्तीय और कानूनी जगत की पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि इतने बड़े बकाए के निपटान और ट्रिब्यूनल के आंतरिक मतभेदों पर आने वाले दिनों में और बड़े कानूनी खुलासे होने की उम्मीद है.




