छात्रों के बीच पहुंचे पूर्व सीएम रघुवर दास ने चेतावनी दी है कि अगर एक हफ्ते के भीतर CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से जांच कराने का आदेश सरकार नहीं देती है तो वह खुद भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर छात्रों के साथ आमरण अनशन पर बैठ जायेंगे. रघुवर के इस बयान में एक बार फिर सियासी पारा गरम हो गया है.
रांची. झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहा युवाओं का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक बवंडर का रूप ले चुका है. राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 20 दिनों से डटे छात्रों का सत्याग्रह उस समय मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में आ गया, जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता Dainik Bhaskar रघुवर दास खुद धरनास्थल पर पहुंचे.
छात्रों के बीच पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने स्पष्ट लहजे में मांग की कि सरकार पूरे मामले की एक हफ्ते के भीतर CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से जांच कराने का आदेश दे. रघुवर दास ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर एक हफ्ते के भीतर सीबीआई जांच का फैसला नहीं लिया गया, तो मैं खुद भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर छात्रों के साथ आमरण अनशन पर बैठूंगा.”
इतना ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा छात्रों पर बनाए जा रहे कथित दबाव की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने अफसरों को अपने करियर और राज्य की जनता के प्रति जवाबदेही की याद दिलाई.
राजधानी बनी छावनी, सीएम आवास पर अभेद्य सुरक्षा
पूर्व सीएम की मौजूदगी और छात्रों के कड़े रुख के बाद रांची का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है. संभावित घेराव और उग्र प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है. इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. जैप-1, जैप-6 और जिला पुलिस के सैकड़ों जवानों को अतिरिक्त बैरिकेडिंग के साथ तैनात किया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है.
सोरेन सरकार का पलटवार और विपक्ष की घेराबंदी
इस पूरे प्रकरण पर झारखंड की सत्तारूढ़ सोरेन सरकार और सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने पलटवार किया है. सरकार का तर्क है कि राज्य पुलिस और CID पूरी निष्पक्षता से जांच कर रही है और छात्रों की अधिकांश मांगें मान ली गई हैं. सरकार का आरोप है कि विपक्ष निष्पाप छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहा है और आंदोलन को भड़काने की कोशिश कर रहा है.
वहीं दूसरी ओर, भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने विधानसभा से लेकर सड़कों तक सरकार को घेर रखा है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि CID जांच केवल मामले को दबाने का प्रयास है, जबकि लाखों युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी (CBI) से जांच कराना ही एकमात्र निष्पक्ष विकल्प है.
वर्तमान परिदृश्य में आर-पार के मूड में छात्र
वर्तमान में आंदोलनकारी अभ्यर्थी JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने की मांगों पर अड़े हुए हैं. 6 छात्र अभी भी लगातार भूख हड़ताल पर हैं. प्रशासन की ओर से देर रात प्रशासनिक अधिकारियों (DC व SSP) ने धरनास्थल पहुंचकर बातचीत का प्रयास किया, लेकिन छात्र सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से वार्ता करने की जिद पर डटे हैं. रघुवर दास के अल्टीमेटम ने इस पूरे मामले को एक नए मोड़ पर ला दिया है, जिससे आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और उग्र होने के आसार हैं.


