कुछ समय पहले राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और अपनी अनूठी शैली के कारण लाइमलाइट में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अब अंदरूनी कलह और फूट की खबरें सामने आने लगी हैं. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उनके करीबी सहयोगी और आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट ने CJP से अलग होकर अपनी एक नई पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) के गठन का ऐलान कर दिया. इस राजनीतिक उठापटक के बाद से पार्टी के भीतर जेन-जी और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का एक बड़ा धड़ा CJP-D के पाले में जाता हुआ दिखाई दे रहा है.
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?
नई पार्टी के फाउंडर मनीष ब्रह्मभट्ट की उम्र करीब 41 साल है और वह पेशे से एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं. उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से बी.कॉम और एफवाई एलएलबी की पढ़ाई की है. चुनावी राजनीति का भी उन्हें अनुभव रहा है; उन्होंने साल 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पालनपुर सीट से एक स्वतंत्र (निर्दलीय) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. हालांकि, उस चुनाव में उन्हें केवल 964 वोट (कुल मतों का 0.53%) मिले थे और वह पांचवें स्थान पर रहे थे.
उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास उस वक्त करीब 44.42 लाख रुपये की कुल संपत्ति थी और उन पर कोई कर्ज नहीं था. हालांकि, उनके खिलाफ कुछ आपराधिक मामले भी दर्ज बताए गए हैं, जिनमें आईपीसी की धारा 325 (गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने वाले बयान), 114, 323, 153, 501 और 502 जैसे विभिन्न आरोप शामिल हैं.
जंतर-मंतर आंदोलन से अलग होने की वजह
मनीष ब्रह्मभट्ट का दावा है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए मूल कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र आंदोलन का एक मुख्य हिस्सा रहे हैं. उन्होंने खुद को इस आंदोलन का एक सक्रिय स्वयंसेवक (स्वयंसेवक) और कोऑर्डिनेटर बताया है. ब्रह्मभट्ट के अनुसार, जब अगस्त महीने में वे गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे—जहां अभिजीत दिपके कोर टीम की बैठक कर रहे थे—तब उन्होंने और उनके साथी राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर प्रदर्शन किया था.
उनका मुख्य आरोप यह था कि आंदोलन को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले आम कार्यकर्ताओं और कोऑर्डिनेटरों को पार्टी के भविष्य के फैसलों से पूरी तरह बाहर रखा जा रहा है. मनीष के मुताबिक, जंतर-मंतर के इस आंदोलन से लगभग 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े हुए थे, लेकिन जब नेतृत्व चुनने की बारी आई, तो उनमें से किसी को भी न तो पूछा गया और न ही कोई प्रतिनिधित्व दिया गया. शुरुआत में यह छात्र आंदोलन पूरी तरह से ‘बिना किसी चेहरे’ के शुरू किया गया था, जिसे सैकड़ों स्वयंसेवकों ने मिलकर सींचा था. लेकिन सफलता मिलने के बाद इसका नेतृत्व कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमट गया.
सीजेपी की ‘तिकड़ी’ और ‘टीम केजरीवाल’ होने के आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट ने मुख्य रूप से पार्टी की उस ‘तिकड़ी’ पर सवाल उठाए हैं, जिसे आंदोलन की सफलता के बाद शीर्ष नेतृत्व में जगह दी गई. अगस्त में पार्टी की कमान संभालते हुए अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया, जबकि सौरव दास और आशुतोष रंका को सह-संयोजक नियुक्त किया गया. ये तीनों ही नेता लगातार मीडिया और सरकार के सामने पार्टी का पक्ष रखते आए हैं.
ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि बिना किसी सलाह के यह लीडरशिप तैयार की गई. जब उन्होंने सह-संयोजक आशुतोष रंका से कोर बैठकों को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा, तो उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की, जिसके चलते ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
पार्टी का ऐलान करते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मूल आंदोलन देश के आम लोगों का था, जिन्होंने अपना खून-पसीना बहाया, लेकिन सफलता मिलते ही इसे “बेच दिया गया और राजनीति कर दी गई.” उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी अब कथित तौर पर ‘टीम केजरीवाल’ बन चुकी है. उनके दावे के अनुसार, दिपके द्वारा बनाई गई 12 सदस्यीय कोर टीम में से कई सदस्य या तो आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं या उनके करीबी दोस्त व कॉलेज के साथी हैं.
अभिजीत दिपके और पार्टी का रुख
दूसरी ओर, अभिजीत दिपके ने पहले ही इन तमाम आरोपों का खंडन किया है. उनका कहना है कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक दल की “बी टीम” नहीं है, बल्कि वे छात्रों की ‘ए टीम’ हैं. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया था कि CJP की कोर टीम के कुछ सदस्य अतीत में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं, जिस पर दिपके का कहना था कि अब उनका आप से कोई संबंध नहीं है.
अब देखना यह होगा कि मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा बनाई गई नई पार्टी CJP-D आने वाले समय में मुख्य कॉकरोच जनता पार्टी के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनती है और क्या इससे इस नए राजनीतिक आंदोलन की दिशा पर कोई असर पड़ेगा.




