दिल्ली प्रदर्शन में करीब 3,100 अलग-अलग खातों से 5,239 साझा किए गए पोस्ट की रीच लगभग 1.8 करोड़ लोगों तक पहुंची थी. इस तरह हर पोस्ट को औसतन 3,500 से अधिक एंगेजमेंट मिला और व्यूज प्रति रील 3 लाख तक पहुंची जबकि रांची आंदोलन के दौरान 290 खातों से 1,062 पोस्ट की पहुंच मात्र 6 लाख व्यूज तक सीमित रही. इस व्यूज में भी लगातार गिरावट दर्ज की गयी.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और झारखंड की राजधानी रांची में हुए समान आंदोलन के दौरान इंस्टाग्राम पर कंटेंट की रीच (पहुंच) को लेकर बड़ा अंतर देखने को मिला है. जहां दिल्ली के प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट्स और रील्स तेजी से ट्रेंड करने लगीं, वहीं रांची के आंदोलन को वह डिजिटल दृश्यता नहीं मिल सकी. इस भारी अंतर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा के एल्गोरिदम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
आंकड़ों में व्यूज और रीच की असमानता
विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली प्रदर्शन से संबंधित करीब 5,239 पोस्ट 3,100 अलग-अलग खातों से साझा किए गए थे, लेकिन प्लेटफॉर्म की रीच की वजह से इन्हें लगभग 1.8 करोड़ लोगों तक पहुंचाया गया. हर पोस्ट को औसतन 3,500 से अधिक एंगेजमेंट मिला और व्यूज प्रति रील 3 लाख तक पहुंचे. इसके विपरीत, रांची आंदोलन के दौरान 290 खातों से 1,062 पोस्ट किए गए, जिनकी कुल पहुंच मात्र 6 लाख व्यूज तक सीमित रही. रांची के मामले में शुरुआती रुझान के बाद व्यूज में लगातार गिरावट दर्ज की गई.
केंद्र सरकार ने मेटा से मांगी रिपोर्ट
इस डिजिटल असमानता का संज्ञान लेते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने मेटा से विस्तृत तथ्यात्मक ब्योरा तलब किया है. आईटी सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, सरकार यह जांच रही है कि जंतर-मंतर और रांची के कंटेंट व्यूज में यह अंतर केवल यूजर्स के एंगेजमेंट के कारण है या इसके पीछे एल्गोरिदम का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव है.
एल्गोरिदम पर उठते राजनीतिक सवाल
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी मेटा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट को बूस्ट या म्यूट करने में कोई पूर्वाग्रह बरता जाता है? हाल ही में जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को हटाए जाने और बाद में मेटा द्वारा माफी मांगकर उसे बहाल किए जाने की घटना ने भी इस बहस को जन्म दिया है कि क्या इंटरनेट मीडिया कंपनियां देश के सामाजिक और राजनीतिक नैरेटिव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं.
कैसे काम करती है इंस्टाग्राम की व्यवस्था?
सामान्य तौर पर इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम फॉलोअर्स के बजाय यूजर्स की पसंद, वॉच-टाइम, लाइक और शेयर के आधार पर फीड तय करता है. यदि यूजर किसी खास विषय के वीडियो में रुचि दिखाता है, तो सिस्टम उसे बिना फॉलो किए भी वैसे ही कंटेंट दिखाता रहता है. हालांकि, इस व्यवस्था के बीच दो एक जैसे आंदोलनों के प्रसारण में इतना बड़ा अंतर सामने आने से तकनीक की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.


