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Home » चमोली टनल हादसा : अंधेरी सुरंग में थमी सांसें, मलबे और पानी के बीच जिंदगी की जंग
देश/दुनिया

चमोली टनल हादसा : अंधेरी सुरंग में थमी सांसें, मलबे और पानी के बीच जिंदगी की जंग

Ocean News DeskBy Ocean News DeskAugust 14, 2026
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NDRF टीम कमांडर अमृत लाल मीणा ने बताया कि जब बचाव टीम मौके पर पहुंची तो सुरंग में बहुत ज़्यादा पानी भरा हुआ था और किनारों से भी पानी रिस रहा था. टीम ने खास उपकरणों का इस्तेमाल करके अब तक पानी से चार शव निकाले हैं. बचाव अभियान अभी भी जारी है और तब तक चलता रहेगा जब तक सभी को बाहर नहीं निकाल लिया जाता. अब तक 18 मज़दूरों को बचाकर इलाज के लिए ज़िला अस्पताल भेजा जा चुका है.

देहरादून. उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में बृहस्पतिवार शाम हुए भीषण हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में जारी सुरंग निर्माण की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गुरुवार यानी 13 अगस्त को शाम पौन सात बजे के आसपास हुई घटना के समय 25 से अधिक श्रमिक सुरंग में काम कर रहे थे. इनमें से ज्यादातर श्रमिक बिहार, झारखंड व छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं.

टीएचडीसी-एनटीपीसी की ओर बनाई जा रही 444 मेगावाट की इस परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। बताया गया कि परियोजना की इस 3.5 किमी लंबी सुरंग में 1.8 किमी भीतर यह हादसा हुआ। तब सुरंग में ग्रेविटी पर पैकिंग का कार्य चल रहा है.

घटना और मुख्य कारण

13 अगस्त की शाम लगभग सात बजे सुरंग के अंदर पैकिंग का कार्य चल रहा था. लगभग 1.8 किलोमीटर भीतर sudden भूस्खलन और तेज धमाके के बाद भारी मात्रा में पानी, गाद और मलबा घुस आया. सुरंग के अंदर काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और जलप्रलय जैसे हालात में फंस गए. प्रारंभिक जांच के अनुसार, भू-गर्भीय हलचल और अत्यधिक वाटर सीपेज (पानी का रिसाव) इस हादसे का मुख्य कारण बना.

राहत एवं बचाव अभियान, नौ की गयी जान

हादसे की सूचना मिलते ही NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मोर्चेबंदी की. हालांकि, सुरंग में गले तक पानी, गाद और ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण रात में अभियान को रोकना पड़ा. अगले दिन शुक्रवार सुबह मशीनरी और हैवी लोडर्स के साथ फिर से राहत कार्य शुरू किया गया. खबर लिखे जाने तक 9 मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि अन्य की तलाश और घायलों का इलाज गोपेश्वर व श्रीनगर के अस्पतालों में जारी है.

तकनीकी बिंदु और खामियां

हिमालय का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील जियोलॉजिकल ज़ोन (Zone 5) में आता है. सुरंग निर्माण के दौरान:

  • वाटर सीपेज ड्रेनेज: सुरंग के अंदर अत्यधिक पानी एकत्र होने की स्थिति में त्वरित निकासी (Pumping System) का अभाव देखा गया.

  • सपोर्ट सिस्टम (Grouting Failure): कमजोर चट्टानों को सहारा देने वाले सेटरिंग और पैकिंग पॉइंट पर भारी दबाव बनने से यह अचानक धंस गई.

  • इमरजेंसी एस्केप रूट: टनल में आपातकालीन निकास और वेंटिलेशन (ऑक्सीजन आपूर्ति) के मानकों की कमी ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और मुश्किल बनाया.

प्रभावित परिवारों की स्थिति

हादसे में शिकार हुए अधिकतर श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से आए गरीब प्रवासी मजदूर हैं. टनल के बाहर अपनों की सलामती की दुआ मांगते परिजनों के चीत्कार से माहौल गमगीन है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वार्ता कर हर संभव मदद और राहत सामग्री का आश्वासन दिया है.

Chamoli Tunnel NDRF Rescue Operation SDRF Uttarakhand News उत्तराखंड चमोली टनल हादसा चमोली न्यूज़ विष्णुगाड़ पीपलकोटी परियोजना
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