नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड खाद्य पदार्थों के डिब्बों पर चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट (वसा) की उच्च मात्रा की चेतावनी वाला लेबल लगाने में हिचकिचाहट दिखाने पर खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को आड़े हाथों लिया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नियामक संस्थाएं जनस्वास्थ्य और बच्चों की भलाई को दरकिनार कर कॉरपोरेट दबाव के आगे नहीं झुक सकतीं.
खाद्य पदार्थों में मिलावट: भौतिक और तकनीकी पक्ष
आज बाजार में मिलने वाले पैक्ड और असंगठित खाद्य पदार्थों में दो तरह की समस्याएं हावी हैं—एक ओर रासायनिक व तकनीकी मिलावट, तो दूसरी ओर खाद्य पदार्थों की संरचनात्मक या भौतिक असुरक्षा.
1. भौतिक पक्ष (Physical Aspects)
- संरचनात्मक घटियापन (Substandard Fillers): प्रोसेस्ड फूड में मात्रा बढ़ाने और लागत घटाने के लिए स्टार्च, चॉक पाउडर, या अखाद्य रंगों का प्रयोग किया जाता है.
- अत्यधिक सोडियम और सैचुरेटेड फैट: नमकीन, भुजिया और स्नैक्स को अधिक समय तक कुरकुरा रखने के लिए सस्ते पाम ऑयल और उच्च मात्रा में नमक का इस्तेमाल होता है, जो भौतिक रूप से धमनियों में थक्के (plaque) जमाने का काम करता है.
- पैकेजिंग की खामियां: खाद्य पैकेजिंग में प्लास्टिक लीचिंग (माइक्रोप्लास्टिक का भोजन में मिलना) और खराब सीलिंग के कारण ऑक्सीकरण (oxidation) से भोजन में भौतिक स्तर पर दुर्गंध व सड़न आने लगती है.
2. तकनीकी और रासायनिक बिंदु (Technical & Chemical Aspects)
- एडल्ट्रेशन और प्रिजर्वेटिव्स: दूध और डेयरी उत्पादों में सिंथेटिक डिटर्जेंट, यूरिया और माल्टोडेक्सट्रिन का उपयोग कर उनका फैट और SNF (सॉलिड-नोट-फैट) स्तर कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है.
- हार्मोनल और मेटाबॉलिक प्रभाव: अत्यधिक ट्रांस-फैट और एडेड शुगर शरीर के इंसुलिन रिस्पॉन्स को प्रभावित करते हैं, जिससे बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज और ओबेसिटी (मोटापा) तेजी से बढ़ रहा है.
- वॉर्निंग लेबलिंग (FSS-Front of Pack Labelling) का अभाव: तकनीकी रूप से FOPL प्रणाली लागू होने से उपभोक्ता आसानी से जान सकते हैं कि उत्पाद में ‘High Fat, Sugar, and Salt’ (HFSS) का स्तर क्या है. FSSAI की ओर से इस चेतावनी प्रणाली को अनिवार्य न बनाना उपभोक्ताओं को अंधेरे में रखने जैसा है.
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद यह जरूरी हो गया है कि खाद्य उत्पादों में मानक लेबलिंग लागू की जाए. उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो पैक्ड फूड खरीद रहे हैं, वह उनके स्वास्थ्य के लिए कितना सुरक्षित है.


