- जनकल्याण मोर्चा के नेताओं का अल्टीमेटम, 15 जुलाई… की डेडलाइन चुकी तो उग्र आंदोलन तय
आदित्यपुर. सालों का इंतजार, करोड़ों की योजनाएं और प्रशासनिक आश्वासनों की अंतहीन फेहरिस्त, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती चार हजार से अधिक की आबादी है. आदित्यपुर के सहारा गार्डन सिटी और आदित्य सिंडिकेट जैसे बड़े इलाकों में भारी जन-आक्रोश के बाद आखिरकार नगर निगम और जुडको (JUIDCO) ने पाइपलाइन बिछाने का काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन निगम की असली परीक्षा यहां पानी पहुंचाने की होगी.
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- “अब वादे नहीं, पानी चाहिए!” – आदित्यपुर नगर निगम के खिलाफ जनता में उबाल, मिला आश्वासन
प्रशासन ने एक हफ्ते में पाइपलाइन और 15 जुलाई तक जलापूर्ति शुरू करने का लिखित भरोसा जरूर दिया है, लेकिन सालों का धोखा झेल चुकी जनता अब सिर्फ कागजी दावों पर शांत बैठने को तैयार नहीं. जनकल्याण मोर्चा से जुड़े स्थानीय लोगों ने साफ कर दिया है कि अगर इस बार तय समय-सीमा चुकी, तो 19 जुलाई से पूरा आदित्यपुर एक अभूतपूर्व और उग्र आंदोलन का गवाह बनेगा. यह लड़ाई अब सिर्फ पाइप बिछाने की नहीं, बल्कि नलों में पानी पहुंचाने की है. उधर, आदित्या सिंडिकेट के गेट पर पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू होने पर पहुंचे प्रेसिडेंट राजीव रंजन सिंह के साथ आरपी सिंह, मदन सिन्हा, अंजय सिंह, मनोज श्रीवास्तव, अरुण कुमार झा आदि ने यह उम्मीद जतायी कि जल्द ही अब जलापूर्ति योजना का पानी सोसाईटी तक पहुंच जायेगा.
नगर निगम मीटर लगायेगा, सोसाईटी के संप से पूर्व की तरह होगी जलापूर्ति
सहारा और सिंडिकेट में जलापूर्ति योजना का पानी पहुंचाने में जुटे सहारा गार्डेन सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शशांक गांगुली ने बताया कि योजना में सोसाइटी तक लाइन बिछाकर पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी. यहां नगर निगम एक चेंबर बनाकर मीटर लगायेगा, जिससे पानी की आपूर्ति होने वाली मात्रा के अनुसार शुल्क तय होगा. इसके बाद स्थानीय सोसाईटी पाइप लाइन बिछाकर पानी संप तक पहुंचायेगी. वहां से पानी पूर्व की ही तरह अपार्टमेंट के ऊपर लगी टंकियों में चढ़ाया जायेगा. उनका प्रयास है कि जलापूर्ति 24 घंटे सुनिश्चित कराने की कोशिश हो.
पानी के नाम पर सोसाईटियों में खर्च हो रहे थे लाखों रुपये, घटेगा बजट, लोगों को होगी राहत
आदित्य सिंडिकेट और सहारा गार्डेन जैसे सोसाईटियों में पानी की किल्लत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां गर्मियों में हर दिन टैंकर से पानी लाना पड़ता था. अगर आदित्या सिंडिकेट में पानी की खपत और खर्च काे देखे तो यहां गर्मियों के तीन माह में हर दिन औसतन तीन टेंडर पानी आता था. एक टैंकर पर 7500 रुपये का भारी-भरकम खर्च आता था, जिसके चलते इन तीन माह में यह आंकड़ा लाखों रुपये (करीब 20 लाख से अधिक) तक पहुंच जाता था. नगर निगम की जलापूर्ति शुरू होने से पानी के नाम पर होने वाले भारी फिजूलखर्च और वित्तीय बोझ से स्थानीय लोगों को हमेशा के लिए राहत मिलने की उम्मीद जगी है. इससे लोगों का पानी पर बजट का खर्च भी कम हो जायेगा.
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