- एनआईटी छात्र जल समाधि: लापरवाही के गहरे दलदल में फंसी व्यवस्था, आक्रोशित सहपाठियों ने किया सड़क जाम
- छात्रों ने छात्र के परिजनों के लिए एनआईटी प्रबंधन से मांगा एक करोड़ का मुआवजा, प्रबंधन के मौन से आक्रोश
आदित्यपुर/जमशेदपुर.
सपने आंखों में सजाए पश्चिम बंगाल के बर्धमान से एनआईटी जमशेदपुर पहुंचे बीटेक अंतिम वर्ष के होनहार छात्र मीर तनवीर हसन रविवार दोपहर आसंगी नदी की उफनती लहरों में समा गए. दोस्तों के सामने उनका तड़पना और फिर हमेशा के लिए ओझल हो जाना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है जो चेतावनियों के बावजूद सोई रही. इस हृदयविदारक घटना ने जहाँ एक ओर तनवीर के परिवार की खुशियां छीन लीं, वहीं एनआईटी परिसर और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं.
2 घंटे बाद पहुंची पुलिस, बचाव के लिए एक रस्सी तक नहीं!
रविवार दोपहर करीब 2:30 बजे मेटालर्जी विभाग के तीन दोस्त तनवीर, जेड आलम और देबु फर्नांडीस आसंगी घाट पर गए थे. नहाने के दौरान अचानक तनवीर गहरे पानी में चले गए. साथी चीखते-चिल्लाते रहे, बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन लहरें उन्हें निगल गईं. हादसे के बाद गुस्सा और रोष तब और भड़क उठा जब प्रशासनिक टीमें सूचना मिलने के करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचीं. छात्रों का सीधा आरोप है कि:
- शुरुआती दौर में डूबते छात्र को बचाने के लिए प्रशासन के पास एक साधारण रस्सी तक उपलब्ध नहीं थी.
- यदि वक्त पर मुस्तैदी दिखाई गई होती और रेस्क्यू उपकरण साथ होते, तो शायद तनवीर आज हमारे बीच होते.
6 महीने में 4 मौतें, फिर भी सुरक्षा के नाम पर ‘शून्य’
यह कोई पहली दुखद घटना नहीं है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 6 महीनों में आसंगी घाट पर यह चौथी मौत है. इसके बावजूद न तो स्थानीय प्रशासन ने कोई सबक लिया और न ही एनआईटी प्रबंधन ने अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए. बार-बार होते हादसों के बाद भी घाट पर न कोई सुरक्षा गार्ड है, न खतरे का बोर्ड और न ही कोई बैरिकेडिंग.
एनआईटी परिसर में आक्रोश का गुबार, छात्रों की मुख्य मांगें
साथी को खोने के गम और व्यवस्था की इस घोर सुस्ती से आक्रोशित छात्रों ने एनआईटी मेन बिल्डिंग के पास सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की. आक्रोशित छात्रों ने प्रशासन एवं प्रबंधन के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- पक्की घेराबंदी: एनआईटी कैंपस के चारों ओर ऐसी पक्की बाउंड्री बने ताकि छात्र असुरक्षित रास्तों से नदी की ओर न जा सकें.
- स्थायी बैरिकेडिंग व चेतावनी बोर्ड: आसंगी नदी के सभी खतरनाक घाटों पर स्थायी बैरिकेड्स व चेतावनी बोर्ड स्थापित हो
- तत्काल रेस्क्यू टीम: आरआईटी थाना क्षेत्र में आपदा प्रबंधन की एक सुसज्जित टीम की चौबीसों घंटे तैनात रहे
- मुआजवा : छात्रों ने तनवीर के परिजनों के लिए एक करोड़ का मुआवजा प्रबंधन से मांगा है
उठते कड़वे सवाल
- क्या एनआईटी प्रबंधन की अपने छात्रों की सुरक्षा के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
- पिछले 6 महीनों में 4 जानें जाने के बाद भी जिला व पुलिस प्रशासन हादसों का इंतजार क्यों करता रहा?
- क्या सुरक्षा इंतजाम केवल हादसों के बाद महज़ कागजी कार्रवाई और आश्वसनों तक ही सीमित रहेंगे?
यह त्रासदी चिल्ला-चिल्लाकर पूछ रही है कि क्या किसी होनहार की जान की कीमत सिर्फ एक औपचारिक बयान और कागजी आश्वासन तक ही सीमित रह जाएगी?



