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Home » आस्था पर अनुशासन का ‘अंकुश’, बाबा धाम में अर्पण से पहले छलकी भक्तों की पीड़ा, जल चढ़ाना भी हुआ मुहाल
ओसियन स्पेशल

आस्था पर अनुशासन का ‘अंकुश’, बाबा धाम में अर्पण से पहले छलकी भक्तों की पीड़ा, जल चढ़ाना भी हुआ मुहाल

SHOBHA SINGHBy SHOBHA SINGHJuly 29, 2026
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वीडियो से फोटो
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श्रावणी मेले और सावन मास की दस्तक के साथ ही बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में आस्था का समुद्र उमड़ पड़ा है. आषाढ़ पूर्णिमा के पहले ही दिन से ‘बाबा धाम’ में कांवरियों और भक्तों का सैलाब अपने आराध्य भोलेनाथ का जलाभिषेक करने उमड़ रहा है.

चारों ओर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष गूंज रहे हैं. लेकिन, आस्था और भक्ति के इस विहंगम दृश्य के बीच मंदिर प्रशासन के कड़े नियमों और व्यवस्थाओं के नाम पर चले ‘अनुशासन के डंडे’ ने भक्तों के भावुक मन को गहरी ठेस पहुंचाई है.

तड़पते भाव और बेबस जलार्पण

बाबा के दरबार में दूर-दूर से मीलों पैदल चलकर पहुंचे श्रद्धालुओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलार्पण की ही बन गई है. मंदिर परिसर से आ रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बैरिकेडिंग और धक्का-मुक्की के बीच भक्तों के लिए बाबा के शिवलिंग तो दूर जलापर्ण के लिए तैयार सिस्टम तक भी जल अर्पित करना मुहाल हो गया है.

अपनी बारी का घंटों इंतजार करने के बाद जब भक्त गर्भगृह के करीब पहुंचते हैं, तो सुरक्षाकर्मियों और व्यवस्था में लगे लोगों की जल्दबाजी के कारण उन्हें ठहरने तक का अवसर नहीं मिलता. भक्त अपने अश्रुपूरित नेत्रों से बाबा को एक नजर निहारना चाहते हैं, लेकिन धक्का-मुक्की के बीच वे अपने पात्र से जल जैसे-तैसे उढ़ेलकर आगे बढ़ने को मजबूर हैं. जिस जल को भक्त बड़े जतन और श्रद्धा से गंगाधामों से भरकर लाते हैं, वह शिव तक श्रद्धा से अर्पित होने के बजाय आपाधापी में बिखर रहा है.

https://oceanpost.in/wp-content/uploads/2026/07/BABADHAM-VIDIO.mp4

सावन की तैयारियों पर उठते सवाल

आगामी पूरे सावन मास को लेकर प्रशासन भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन पूर्णिमा के पहले ही दिन की यह अव्यवस्था और भक्तों की बेबसी उन दावों की पोल खोल रही है.

  • प्रबंधन या केवल दबाव? भीड़ नियंत्रण के नाम पर बनाया गया अनुशासन का ढांचा व्यवस्था बनाने से ज्यादा भक्तों की परेशानी का कारण बनता दिख रहा है.
  • भाव-भक्ति की अनदेखी: प्रशासन का पूरा ध्यान केवल भीड़ को जल्दी से बाहर निकालने पर है, जिससे शिव और भक्त के बीच का आत्मिक संबंध इस आपाधापी में पिस रहा है.

भक्तों का कहना है कि वे नियम और अनुशासन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें कम से कम हर श्रद्धालु शांति और संतुष्टि के साथ जलार्पण कर सके. यदि सावन की शुरुआत में ही भक्तों को इस तरह की कठिनाइयों और ‘अनुशासन के डंडे’ का सामना करना पड़ रहा है, तो आने वाले मुख्य श्रावणी मेले में स्थिति और भी विकट हो सकती है. प्रशासन को समय रहते अपनी रणनीति में सुधार करना होगा ताकि आस्था का यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के लिए प्रताड़ना नहीं, बल्कि अलौकिक अनुभव बन सके.

Deoghar News Jharkhand News ocean special जलाभिषेक देवघर बाबा धाम बाबा बैद्यनाथ मंदिर श्रावणी मेला
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मास कम्युनिकेशन की पृष्ठभूमि, डिजिटल मीडिया में गहराई से रुचि रखने वाली शोभा सिंह हिंदी न्यूज राइटर और OCEANPOST.IN की सब-एडिटर हैं. देश-दुनिया की हलचलों, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरों को शब्दों के सही चयन और बेहतरीन संपादन (Editing) के जरिए पाठकों तक आसान भाषा में पहुंचा रहीं हैं.

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