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Home » टाटानगर पार्सल में CPS ‘चौधरी’ का ‘राज’! लीज मामले में घिरे मुख्य पर्यवेक्षक, SR DCM की चुप्पी पर उठे सवाल
रेलवे

टाटानगर पार्सल में CPS ‘चौधरी’ का ‘राज’! लीज मामले में घिरे मुख्य पर्यवेक्षक, SR DCM की चुप्पी पर उठे सवाल

Ocean News DeskBy Ocean News DeskJune 19, 2026
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  • ओवरलोडिंग के लिए लीजधारी पर कड़े एक्शन की नहीं की अनुशंसा, क्या जुर्माना लेकर राहत देने की तैयारी की जा रही है ?
  • मीडिया स्टिंग में सामने आई ओवरलोडिंग के मामले को कथित तौर पर उपलब्धि बताने में जुटे हैं रेलवे के अधिकारी-कर्मचारी  
  • स्थानीय सूत्रों का मानना है कि यदि रेल प्रशासन या विजिलेंस टाटानगर स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज जांच ले, तो एक बड़े घोटाले की पोल खुल सकती है

जमशेदपुर. टाटानगर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में क्षमता से अधिक पार्सल लोडिंग (ओवरलोडिंग) का एक गंभीर मामला सामने आया है. हाल ही में अहमदाबाद एक्सप्रेस में तय सीमा से 50% अधिक माल लोड किए जाने का भंडाफोड़ होने के बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली चर्चा में है. सूत्रों और आरोपों के मुताबिक, इस कथित पार्सल सिंडिकेट को लेकर सीनियर डीसीएम और सीपीएस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. जहां एक तरफ नियमों के उल्लंघन पर कड़े एक्शन की मांग हो रही है, वहीं दूसरी ओर महज 78 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा करने की आशंका जताई जा रही है.

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ओवरलोडिंग का यह कथित खेल इससे पहले पकड़ में क्यों नहीं आया? मीडिया रिपोर्ट्स और स्टिंग में मामला उजागर होने के बाद यह आशंका गहरा गई है कि टाटानगर में ओवरलोडिंग का यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था, जिसके जरिए पार्सल लीज सिंडिकेट द्वारा रेलवे को बड़े राजस्व का चूना लगाए जाने के आरोप लग रहे हैं.

TATANAGAR : रेलवे पार्सल में 2 टन ओवरलोडिंग के खेल में Sr DCM की रडार पर CPS अमित चौधरी, हटायें जायेंगे !

इसके बावजूद, पार्सल ओवरलोडिंग के इस गंभीर मामले में अब तक स्थानीय स्तर पर किसी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई या उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की घोषणा नहीं की गई है. रेल प्रशासन की इस कथित सुस्ती और खामोशी को लेकर पार्सल सिंडिकेट को बढ़ावा मिलने की आशंका जताई जा रही है, जो रेल सुरक्षा और नियमों के अनुपालन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है. हालांकि, इस पूरे विषय और आरोपों के संबंध में सीनियर डीसीएम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है, उनकी प्रतिक्रिया आते है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा.

78 हजार का जुर्माना सिर्फ औपचारिकता तो नहीं?

इस गंभीर सुरक्षा चूक के सामने आने के बाद लीजधारी पर लगाए गए मात्र 78,000 रुपये के जुर्माने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. चर्चा है कि क्या इतने बड़े मामले में महज मामूली जुर्माना लगाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है ? पार्सल ओवरलोडिंग का यह मामला सामने आने के बाद भी चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया और सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी के स्तर से इस पर कोई कड़ा रुख या बड़ी विभागीय कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है. सवाल यह उठाया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों की ऐसी अनदेखी क्या किसी बड़े जोखिम को आमंत्रण नहीं दे रही है?

प्रशासनिक तालमेल या नियमों की अनदेखी? उठ रहे हैं सवाल

रेलवे के हलकों में इन दिनों टाटानगर पार्सल कार्यालय की मौजूदा कार्यप्रणाली और प्रशासनिक तालमेल को लेकर कई तरह के कटाक्ष किए जा रहे हैं. दबी जुबान में चर्चा है कि वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रभारियों के बीच के इसी कथित समन्वय के कारण ही पार्सल क्षेत्र में सिंडिकेट के हौसले बुलंद हैं और नियमों की अनदेखी हो रही है.

नियमों और प्रशासनिक चश्मे से देखें, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि पार्सल में गंभीर खामियां सामने आने के बाद भी अब तक धरातल पर कोई कड़ा रुख क्यों नहीं अपनाया गया? पूर्व में यहां हुई आंतरिक पोस्टिंग की प्रक्रियाओं को लेकर भी रेलकर्मियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं थीं. अब जब मीडिया रिपोर्ट्स में ओवरलोडिंग का यह संवेदनशील सुरक्षा मामला उजागर हो चुका है, तब भी सीनियर डीसीएम स्तर से किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच समिति का गठन न होना और इस विषय पर प्रशासनिक चुप्पी साधे रखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

पार्सल लीज मामले में लग रहे आरोपों पर जब मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक (CPS) ‘चौधरी’ से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनकी दलील यह थी कि “अगर हम वजन नहीं करते तो क्या मीडिया के स्टिंग से ओवरलोडिंग साबित हो जाती!” लेकिन इस तर्क के बाद भी यह सवाल अनुत्तरित है कि आखिर इतने लंबे समय से चल रही इस कथित गड़बड़ी को पहले क्यों नहीं रोका गया?

आरोप लग रहे हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर से प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण ही पार्सल सिंडिकेट को बढ़ावा मिला है और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर 130 किमी की रफ्तार वाली ट्रेनों में ओवरलोडिंग का खेल चल रहा था.

पार्सल सिंडिकेट के नेटवर्क और कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

टाटानगर स्टेशन पिछले कुछ वर्षों से पार्सल सिंडिकेट और कुछ अधिकारियों की कथित अनदेखी के कारण विवादों में रहा है. सूत्रों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन को छिपाने के लिए टाटानगर स्टेशन को एक मुख्य ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका है, जहां पार्सल प्रबंधन के उत्तरदायित्व पर उंगलियां उठ रही हैं.

आरोप लग रहे हैं कि कई महत्वपूर्ण ट्रेनों में क्षमता से अधिक पार्सल लोडिंग का यह सिलसिला बिना किसी ठोस कार्रवाई के जारी है. प्रक्रिया के अनुसार, कथित तौर पर अन्य स्टेशनों से आने वाले ओवरलोड माल को यहां उतारकर नियमों के विपरीत दूसरी ट्रेनों में एड्जस्ट किया जाता है. जानकारों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क की हकीकत जानने के लिए यदि विजिलेंस विभाग टाटानगर स्टेशन के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की गहनता से जांच करे, तो नियमों की अनदेखी के इस मामले का पूरी तरह से पर्दाफाश हो सकता है.

… क्रमश : 

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