- ग्लोरिया इंजीनियरिंग हादसे में ऑपरेटर की मौत और सात मजदूरों के घायल होने के बाद सुरक्षा बिंदुओं पर उठ रहे सवाल
जमशेदपुर/आदित्यपुर. आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के फेज दो स्थित ग्लोरिया इंजीनियरिंग कंपनी में गुरुवार दोपहर 12:30 बजे हुआ भीषण विस्फोट महज एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा में अनदेखी और औद्योगिक लापरवाही का गंभीर मामला प्रतीत होता है. टाटा मोटर्स की एंसीलरी कंपनी मानी जाने वाली ग्लोरिया इंजीनियरिंग में पाउडर कोटिंग प्रक्रिया के दौरान बेकिंग ओवन फटने से एक कामगार गम्हरिया निवासी मुरली पात्रो (30) की मौत हो गई, जबकि सात अन्य मजदूर घायल हो गए.
घटना के बाद स्थानीय पुलिस और कारखाना निरीक्षक विभाग द्वारा शुरू की गई शुरुआती जांच कई सवाल खड़े करती है: क्या ओवन के प्रेशर वॉल और ऑटोमैटिक कट-ऑफ सिस्टम की नियमित जांच की जा रही थी? क्या ओवन में मानक सुरक्षा उपकरणों का रखरखाव सही तरीके से हुआ था?
कैसे हुआ हादसा, दबाव या तकनीकी चूक
जानकारी के अनुसार, जिस समय हादसा हुआ, उस समय फैक्ट्री में तैयार पुर्जों को बेकिंग ओवन में निश्चित तापमान पर पकाने (पाउडर कोटिंग) का काम चल रहा था. प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के अनुसार, ओवन के भीतर गैस का दबाव (Gas Pressure) अचानक अत्यधिक बढ़ गया.
दबाव बढ़ने से ओवन का ऊपरी भारी धातु का ढक्कन विस्फोट के साथ टूटकर नीचे आ गिरा, जिसकी चपेट में वहां कार्यरत ऑपरेटर मुरली पात्रो और अन्य मजदूर आ गए. मुरली पात्रो को गंभीर हालत में टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. अन्य घायलों का इलाज टीएमएच और स्थानीय नर्सिंग होम में चल रहा है.
सुरक्षा मानकों पर उठे 4 बड़े सवाल
- प्रेशर रिलीज वाल्व और सेंसर काम कर रहे थे?
बेकिंग ओवन या फर्नेस में दबाव और तापमान नियंत्रित करने के लिए ऑटोमैटिक प्रेशर रिलीज वाल्व और अलार्म लगे होते हैं. गैस का दबाव बढ़ने पर क्या अलार्म बजा या रिलीज वाल्व समय पर खुला? शुरुआती रिपोर्ट संकेत देती हैं कि ओवन में अत्यधिक दबाव बनने तक सिस्टम ने चेतावनी नहीं दी. - मेंटेनेंस और सेफ्टी ऑडिट की स्थिति:
कारखाना अधिनियम (Factory Act) के तहत उच्च तापमान और दबाव पर चलने वाले उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस और सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य है. ग्लोरिया इंजीनियरिंग प्रबंधन द्वारा हाल में इस ओवन की जांच कराई गई थी या नहीं, इसकी जांच मुख्य कारखाना निरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा के नेतृत्व में की जा रही है. - पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) की उपलब्धता:
ओवन और पाउडर कोटिंग प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के पास अग्निरोधक कपड़े, सेफ्टी हेलमेट और सुरक्षा गियर का होना अनिवार्य है. घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धातु के भारी हिस्से से लगी चोटें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि सुरक्षात्मक उपकरण नाकाफी थे. - प्रबंधन की चुप्पी और जवाबदेही:
हादसे के कई घंटे बीत जाने के बाद भी ग्लोरिया इंजीनियरिंग प्रबंधन (जिसका स्वामित्व पुणे के उद्योगपति राजकुमार के पास बताया जा रहा है) की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया. औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रबंधन की यह चुप्पी जवाबदेही से बचने का प्रयास हो सकती है.
आगे की कार्रवाई
मुख्य कारखाना निरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा के अनुसार, हादसे की वजह फर्नेस/ओवन में विस्फोट होना है और जांच टीम शुक्रवार को घटनास्थल का गहन मुआयना करेगी. दोषी पाए जाने पर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में लगातार बढ़ते हादसों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता किस तरह मजदूरों की जान पर भारी पड़ता है. इस हादसे की निष्पक्ष जांच ही मृतक के परिवार को न्याय और अन्य मजदूरों को सुरक्षित कार्य परिवेश दिला सकती है.
- JAMSHEDPUR : आदित्यपुर की कंपनी में विस्फोट, क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी बनी मजदूर की मौत का कारण? - July 31, 2026
- सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद बड़ा फैसला, झारखंड में मृत व रिटायर्ड शिक्षकों के आश्रितों को भी मिलेगा ग्रेड-1 वेतनमान - July 31, 2026
- आयुष्मान का 1000 करोड़ अटका, अस्पतालों ने मोड़ा मुंह: बेबस मरीज दर-दर भटकने और महीनों इंतजार को मजबूर - July 31, 2026





