मेदिनीनगर (पलामू). झारखंड में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों तबादलों व पदस्थापन की जोर पकड़ती चर्चाओं के बीच डॉक्टरों की धड़कन बढ़ी हुई है. एक तरफ जहां अधिकारियों और डॉक्टरों के फेरबदल के जरिए व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच), पलामू से सामने आई एक गंभीर शिकायत ने पूरी व्यवस्था की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है.
पलामू प्रमंडल के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के वर्तमान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय कुमार के खिलाफ राज्यपाल को पत्र भेजकर प्रशासनिक मनमानी, पद के दुरुपयोग और भारी वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की गुहार लगाई गई है.
विदेश यात्रा से लेकर टेंडर तक, शिकायत के मुख्य बिंदु
राज्यपाल को सौंपी गई शिकायत में अस्पताल प्रबंधन के कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- स्पॉन्सर विदेश यात्रा का विवाद: शिकायत का सबसे संवेदनशील बिंदु अप्रैल 2026 में डॉ. अजय कुमार द्वारा की गई विदेश यात्रा है. आरोप है कि इस यात्रा का पूरा वित्तीय खर्च वैभवी एंटरप्राइज के संचालक द्वारा उठाया गया था. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी सेवा नियमावली और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का उल्लंघन है.
- टेंडर व खरीद प्रक्रिया में अनियमितता: अस्पताल में निर्माण कार्यों की स्वीकृति, सामग्री क्रय, बिलों के भुगतान, और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में नियमों को दरकिनार कर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप है.
- निजी एजेंसी पर मेहरबानी: शिकायत में उल्लेख है कि वैभवी एंटरप्राइज (संचालक: शैलेंद्र कुमार) को अनुचित फायदा देने के उद्देश्य से कार्य किया गया. उनके कार्यकाल के दौरान वैभवी एंटरप्राइज को जारी सभी कार्यादेशों (Work Orders) और भुगतानों की जांच की मांग की गई है.
- कॉल रिकॉर्ड्स और वित्तीय जांच की मांग: मामले की तह तक पहुंचने के लिए डॉ. अजय कुमार के कॉल विवरण, बैंक लेन-देन, होटल बुकिंग और यात्रा टिकटों के स्रोतों की विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है.
जमीनी हकीकत और जांच के परिणाम पर गहराती आशंका
अस्पताल की जमीनी सच्चाई यह है कि दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों को दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है, जबकि प्रबंधन पर करोड़ों के लेन-देन और सांठगांठ के आरोप लग रहे हैं.
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर उठ रहा है. प्रशासनिक गलियारों में इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि पूर्व में हुए कई बड़े मामलों की तरह यह जांच भी महज एक ‘कागजी खानापूर्ति’ बनकर न रह जाए.
जिस तरह से तबादला उद्योग और रसूखदार ठेकेदारों की जड़ें मजबूत हैं, उससे यह अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि उच्च स्तर पर राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण के कारण जांच की आंच को ठंडा किया जा सकता है या फाइलों को दबाया जा सकता है.
स्थानीय जनता और समाजशास्त्रियों का मानना है कि यदि इस शिकायत पर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह न केवल पलामू की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा, बल्कि सरकारी जांच तंत्र पर से आम जनता का भरोसा भी हमेशा के लिए उठ जाएगा.
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