रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के करीब दो दशक से चले आ रहे अप्रशिक्षित शिक्षकों के सबसे बड़े सेवा विवाद को हल करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज होने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वर्ष 2019 के अपने पुराने संकल्प को बदलते हुए नया संकल्प जारी कर दिया है.
इस नए आदेश के लागू होने से मृत अप्रशिक्षित शिक्षकों के आश्रितों और सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हो चुके शिक्षकों के लिए वित्तीय लाभ और ग्रेड-1 वेतनमान पाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
क्या है नया संकल्प और वित्तीय लाभ की शर्त
सरकार द्वारा वर्ष 2019 में जारी किए गए संकल्प में एक शर्त जोड़ी गई थी, जिसके तहत मृत और सेवानिवृत्त हो चुके अप्रशिक्षित शिक्षकों को कोई भी वित्तीय लाभ नहीं मिलना था. हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2023 को सरकार की इस शर्त को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया था. इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद अब 2019 के उस संकल्प में संशोधन किया गया है.
नए संकल्प के तहत वित्तीय लाभ से जुड़ी बंदिश को पूरी तरह हटा दिया गया है. अब ऐसे शिक्षक, जो स्वयं सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके आश्रित निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभाग में अपना दावा प्रस्तुत कर सकेंगे और नियमानुसार वित्तीय लाभ प्राप्त कर सकेंगे.
किन शिक्षकों और मामलों पर पड़ेगा असर
सरकार के इस नए फैसले का सीधा असर वर्ष 1982, 1983, 1984, 1986, 1987, 1988, 1994 और 1999–2000 में नियुक्त हुए पात्र अप्रशिक्षित शिक्षकों पर पड़ेगा.
इसके अलावा, वर्ष 2012 तक अनुकंपा (Compassionate Appointment) के आधार पर नियुक्त हुए पात्र शिक्षकों के मामलों में भी यह व्यवस्था समान रूप से लागू होगी. यदि संबंधित शिक्षक की मृत्यु हो चुकी है या वह सेवानिवृत्त हो चुका है, तो शिक्षक स्वयं या उनके वैध आश्रित आवेदन देकर अपना बकाया वित्तीय दावा प्रस्तुत कर सकते हैं.
जानिए क्या है ‘ग्रेड-1’ और विवाद की मूल वजह
ग्रेड-1 सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों का पहला प्रोन्नति ग्रेड (Promotional Grade) होता है. इसका सीधा असर शिक्षकों की वरिष्ठता (Seniority), वेतनमान, अगली प्रोन्नति और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभों पर पड़ता है.
मूल विवाद इस बात को लेकर था कि अप्रशिक्षित शिक्षकों की वरिष्ठता नियुक्ति तिथि से मानी जाए या प्रशिक्षण पूरा होने की तिथि से. अदालतों ने अपने विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया था कि वरिष्ठता नियुक्ति तिथि से ही मानी जाएगी. इसी आधार पर सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा.
सरकार द्वारा जारी इस नए आदेश से हजारों शिक्षक परिवारों को सालों के कानूनी संघर्ष के बाद उनका हक और वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद जग गई है.



