आदित्यपुर. आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में दशकों से चली आ रही गंभीर पेयजल समस्या एक बार फिर जनआंदोलन का रूप लेने की ओर है. में जलापूर्ति योजनाओं को लेकर प्रशासनिक दावों और हकीकत के बीच बढ़ती खाई ने स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है. सामाजिक संगठन जनकल्याण मोर्चा ने इस मामले में एक बार फिर मोर्चा खोलते हुए आदित्यपुर नगर निगम और जिला प्रशासन को 15 सितंबर 2026 तक सभी वैध उपभोक्ताओं तक पानी पहुंचाने का अल्टीमेटम दिया है.
नए चरण की शुरुआत और वर्तमान स्थिति
आदित्यपुर जलापूर्ति योजना के तहत 30 MLD सीतारामपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 1 अगस्त 2026 को आदित्यपुर-2 के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति का आंशिक शुभारंभ किया गया था. यद्यपि प्रशासनिक स्तर पर इसे एक बड़ी सफलता के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी निराशाजनक बनी हुई है. एक महीने का समय बीत जाने के बाद भी आरआईटी थाना क्षेत्र के बड़े हिस्से पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं. जनकल्याण मोर्चा के अनुसार:
- उपभोक्ता आंकड़े: आदित्यपुर-2 में कुल वैध उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 12,000 है, लेकिन वर्तमान में महज 7,000 घरों तक ही पानी पहुंच पा रहा है.
- प्रभावित क्षेत्र: आदित्यपुर-2 के रोड नंबर 5, 6, 7, 8, 9 और 10 के अलावा जनता फ्लैट, बाबा कुटी, ट्रांसपोर्ट कॉलोनी, कृष्णपुर और आसंगी जैसे घने आबादी वाले इलाकों में अब तक नियमित आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी है.
संरचनात्मक लापरवाही का आलम यह है कि एक तरफ जल संकट बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ GAIL इंडिया द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान लगभग 65 स्थानों पर पेयजल पाइपलाइनों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है, जिससे पानी घरों तक पहुंचने के बजाय सड़कों पर बह रहा है.
जनआंदोलन व संघर्ष का लंबा इतिहास
आदित्यपुर में पानी की लड़ाई कोई नई नहीं है. यह आंदोलन विगत कई वर्षों से लगातार प्रशासनिक चौखटों से लेकर अदालत के कमरों तक लड़ा जा रहा है.
- हाईकोर्ट में जनहित याचिका (2023): पेयजल संकट और अधूरी पड़ी योजनाओं को लेकर वर्ष 2023 में जनकल्याण मोर्चा के अध्यक्ष सह वरिष्ठ अधिवक्ता ओम प्रकाश द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (WP (PIL) No. 3629/2023) दायर की गई थी. इस याचिका के माध्यम से JUIDCO, ठेका एजेंसी जिंदल और स्थानीय प्रशासन की लेथारिजिया को कानूनी चुनौती दी गई. अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही रुकी हुई योजनाओं में कुछ गति आई और प्रशासनिक अमला हरकत में आया.
- 13 जून 2026 का ऐतिहासिक महाधरना : कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर संघर्ष को तेज करते हुए 13 जून 2026 को आदित्यपुर में एक विशाल महाधरना का आयोजन किया गया था. इस जनआंदोलन में हजारों की संख्या में नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने हिस्सा लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई. इसी महाधरने के भारी दबाव के बाद सरायकेला-खरसवां के उपायुक्त ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया और एजेंसियों को सख्त निर्देश जारी किए थे.
- सापड़ा 60 MLD प्लांट की डेडलाइन: 13 जून के महाधरने के दौरान ही जनाक्रोश को देखते हुए कार्यदायी एजेंसी जिंदल और JUIDCO को 60 MLD सापड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से हर हाल में दिसंबर 2026 तक जलापूर्ति शुरू करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया था. सापड़ा प्लांट आदित्यपुर-1 के एक बड़े भू-भाग की प्यास बुझाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
आगामी रणनीति और हाईकोर्ट पर टिकी नजरें
जनकल्याण मोर्चा के अध्यक्ष अधिवक्ता ओम प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि सीतारामपुर प्लांट से आंशिक जलापूर्ति शुरू होना महज एक छोटा सा कदम है, इसे पूर्ण सफलता नहीं माना जा सकता. जब तक अंतिम वैध उपभोक्ता के नल तक पानी नहीं पहुंच जाता, तब तक आंदोलन विश्राम नहीं लेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा के भीतर जलापूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है.
आंदोलन की रूपरेखा
- 15 सितंबर का अल्टीमेटम: 15 सितंबर 2026 तक सभी शेष 5,000 वैध उपभोक्ताओं को कनेक्शन और पानी उपलब्ध कराने की मांग की गई है.
- हाईकोर्ट में 3 सितंबर की सुनवाई: झारखंड हाईकोर्ट में 3 सितंबर 2026 को इस PIL की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है, जहां मोर्चा प्रशासन की कमियों और गेल (GAIL) द्वारा पाइपलाइन क्षति का ब्यौरा अदालत के समक्ष रखेगा.
- दिसंबर 2026 की समयसीमा: सापड़ा 60 MLD प्लांट का काम निर्धारित समय (दिसंबर 2026) के भीतर पूरा कराने के लिए प्रशासन पर लगातार दबाव बनाए रखा जाएगा.
संबंधित खबरें
- यह भी पढ़ें : “करोड़ों की योजना में 100 मीटर का रोड़ा”, पानी नहीं मिला तो कल थमेगा आदित्यपुर!
- “अब वादे नहीं, पानी चाहिए!” – आदित्यपुर नगर निगम के खिलाफ जनता में उबाल, मिला आश्वासन
- आदित्यपुर : सहारा-सिंडिकेट में शुरू हुआ पाइपलाइन का काम, निगम की असली परीक्षा होगी … पानी पहुंचाना!
- आदित्यपुर सहारा में जल ‘क्रांति’, सिंडिकेट में ‘सन्नाटा’, एक साथ लड़ी लड़ाई, फिर क्यों पिछड़े सिंडिकेट के बाशिंदे ?




