- टेंडर फाइनल, प्राक्कलन तैयार, पाेटका विधायक संजीव सरदार के शिलान्यास का इतजार
- दादी बागान और भुवनेश्वर नगर में लोगों के घरों में घुस रहा पानी, पुलिया के हो गये 30 साल
- प्रशासन ने कराया बागबेड़ा-दादी बागान के रास्ते का अतिक्रमण, जीवन हुआ नारकीय !
जमशेदपुर. पोटका विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बागबेड़ा क्षेत्र के कीताडीह पश्चिमी पंचायत (दादी बागान) से एक बेहद असंवेदनशील और चिंताजनक तस्वीर सामने आयी है. यहां पिछले 5 माह नाला और पुलिया का निर्माण कार्य पूरी तरह से रुका हुआ है, जिससे स्थानीय लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.

सबसे बड़ा विडंबना यह है कि टेंडर पास होने और एग्रीमेंट पूरा होने के बावजूद केवल इसलिए काम शुरू नहीं हो पा रहा है क्योंकि स्थानीय जनप्रतिनिधि के ‘नारियल फोड़ने और लड्डू बांटने’ की परंपरा पूरी नहीं की जा सकी है. स्थानीय लोगों का कहना है पाेटका विधायक संजीव सरदार का यहां इतजार हो रहा है.
‘विकास’ के इंतजार में बेहाल जनता और राजनीतिक उपेक्षा
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बागबेड़ा को किताडीह पश्चिमी पंचायत से जोड़ने वाला यह एकमात्र मुख्य मार्ग है, जिससे रोजाना हजारों लोग, स्कूली बच्चे और नौकरीपेशा आवाजाही करते हैं. लेकिन जनप्रतिनिधियों और विभाग की उदासीनता के कारण यह मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है.

स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष का शिकार हो गया है. लोगों का सीधा कहना है कि राजनीतिक समीकरणों और वोट बैंक की राजनीति के चलते इस क्षेत्र के विकास को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है. चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेताजी आज जनता की इस विकराल समस्या पर पूरी तरह आंखें मूंदकर बैठे हैं. आलम यह है कि जनता के बार-बार गुहार लगाने और विधायक कार्यालय तक मिन्नतें करने के बाद भी सिर्फ झूठे आश्वासन और तारीखें ही मिल रही हैं.
जलभराव और गंदगी से घिरी बस्तियां, खतरे में जिंदगियां
- घरों में घुस रहा गंदा पानी: नाला पूरी तरह जाम और ओवरफ्लो होने के कारण बारिश का गंदा पानी सीधे लोगों के घरों और आंगन में घुस रहा है. लोग अपने घरों के आगे बांध बनाने को विवश हैं.
- बदबू और संक्रामक बीमारियों का खतरा: मार्ग पर नाले का कचरा और गंदगी इस कदर पसरी है कि वहां खड़े रहना भी मुहाल है. छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों का नाक पर हाथ रखकर गुजरना मजबूरी बन गया है.
- त्योहारों की खुशियां फीकी: रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व पर भी बहनें इस बदतर रास्ते और पानी के भराव के कारण वापस लौटने को मजबूर हुईं.
- हादसों का खतरा: नाला और सड़क एक लेवल पर आ जाने के कारण पानी के तेज बहाव में दोपहिया वाहन चालकों के बहने और दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं आम हो चुकी हैं.
जनता का फूटा गुस्सा, दी आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के लोगों का सब्र अब जवाब दे चुका है. जनता का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों के अहंकार और राजनीतिक प्राथमिकताओं के फेर में आम आदमी पिस रहा है. स्थानीय निवासी शिव कुमार सिंह और अन्य ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द नाला और पुलिया निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे डीसी कार्यालय के सामने अनशन और धरना पर बैठने के लिए मजबूर होंगे.
यह स्थिति इस बात का करारा प्रमाण है कि कैसे संवेदनहीन राजनीति और प्रशासनिक लालफीताशाही आम जनता के बुनियादी अधिकारों को कुचल देती है. विकास के दावों के बीच, जमशेदपुर की यह जनता आज भी एक ‘नारियल’ और ‘लड्डू’ के इंतजार में कागजी विकास के रास्ते देख रही है.




