- RP की ओर से पांच अगस्त को NCLAT की सुनवाई के बाद कुछ और कर्मचारियों के खाते में राशि भेजी गयी
- अब भी कई कर्मचारी को नहीं भेजी गयी है राशि, ग्रेच्यूटी -पीएफ व दूसरे बिंदुओं पर सस्पेंश बरकरार
जमशेदपुर/नई दिल्ली. जमशेदपुर की ऐतिहासिक इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड (केबुल कंपनी) के हजारों कर्मचारियों और मजदूरों की निगाहें जिस 5 अगस्त को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) की प्रधान पीठ में होने वाली सुनवाई पर टिकी थीं, उसमें एक बड़ा प्रशासनिक व कानूनी मोड़ आ गया है.
जस्टिस योगेश खन्ना (कार्यवाहक अध्यक्ष) और अजय दास मेहरोत्रा (तकनीकी सदस्य) की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है. ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि चूंकि स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान (COC) से जुड़ी मुख्य अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए शीर्ष अदालत के निर्णय का इंतजार करना ही उचित होगा.
सुनवाई का मुख्य आधार और NCLAT का रुख
NCLAT में यह अंतरिम आदेश शंभू शरण पांडे और भगवती सिंह द्वारा दायर कंपनी अपीलों (संख्या 836/2026, 845/2026, 846/2026 एवं 561-564/2025) पर आया है, जिसमें रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) पंकज कुमार टिबरेवाल व अन्य को पक्षकार बनाया गया है.
- पूर्व निर्णय का हवाला: ट्रिब्यूनल ने नोट किया कि NCLT द्वारा स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान को NCLAT ने 30 जून 2026 के अपने फैसले (कंपनी अपील संख्या 662/2025) में सही ठहराया था.
- सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला: 30 जून के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है. याचिकाकर्ताओं ने लेनदारों की समिति (CoC) में अवैध पक्षों को शामिल करने का मुद्दा दोबारा उठाया, जिस पर ट्रिब्यूनल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम रुख के बाद ही आगे विचार किया जाएगा.
मजदूर पक्ष का गंभीर आरोप, ‘हाईकोर्ट का आदेश छिपाकर बनी फर्जी CoC’
NCLAT में सुनवाई के दौरान मजदूरों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, आकाश शर्मा और रिशव रंजन ने वर्तमान व पूर्व RP की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए, अधिवक्ताओं ने तीन बिंदुओं को बेंच के सामने उठाया और RP की भूमिका पर सवाल उठाये.
- दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की अनदेखी: अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2016 के आदेश में स्पष्ट किया था कि इंकैब पर बैंकों की कुल देनदारी महज 21.63 करोड़ रुपये थी (जो 1992 से पहले के ऋणों से संबंधित थी और 1995 के बाद निष्प्रभावी हो चुकी थी). आरोप है कि इस आदेश को NCLT कोलकाता बेंच से छिपाया गया.
- फर्जी वित्तीय दावों का खेल: मजदूर पक्ष का दावा है कि बैंकों का वैध बकाया न होने के कारण नियमानुसार केवल श्रमिक ही CoC के सदस्य बनने के पात्र थे. इसके बावजूद पूर्व RP शशि अग्रवाल और वर्तमान RP पंकज टिबरेवाल ने हजारों करोड़ रुपये के फर्जी दावों (जैसे ट्रॉपिकल वेंचर्स व अन्य वित्तीय कंपनियों के दावे) के आधार पर वित्तीय लेनदारों की CoC गठित कर दी.
- ट्रॉपिकल वेंचर्स विवाद: 30 जून 2026 को NCLAT द्वारा ट्रॉपिकल वेंचर्स के 1,646 करोड़ रुपये के दावे को खारिज कर केवल 85 करोड़ रुपये पर विचार करने के निर्देश के बावजूद, मजदूर पक्ष ने बचे हुए 85 करोड़ के दावे को भी अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील दायर की है.
कर्मचारियों में गहराता संशय और आक्रोश
कोर्ट के चक्कर और तारीखों के बीच केबुल टाउनशिप के ऑनरोल व रिटायर्ड कर्मचारियों में असमंजस बना हुआ है.
- पत्राचार और भुगतानों में विसंगति : बिना पत्रांक या तारीख वाले वायरल पत्रों के जरिए दोबारा बैंक डिटेल्स मांगने और चुनिंदा खातों में ही आंशिक भुगतान किए जाने से कर्मचारियों में नाराजगी है. हालांकि पांच के NCLAT की सुनवाई के बाद RP की ओर से कुछ और कर्मचारियों के खाते में राशि भेजी जाने की खबर है.
- सेवा निरंतरता व ग्रेच्युटी : वेदांता द्वारा टेकओवर की कवायद के बीच कर्मचारियों को सेवा निरंतरता का लिखित आश्वासन न मिलने और ग्रेच्युटी के अधूरे आकलन को लेकर मजदूर नेता यूके शर्मा समेत अन्य यूनियनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है.
अब 5 नवंबर पर टिकीं निगाहें
NCLAT द्वारा अगली तारीख 5 नवंबर 2026 तय किए जाने से अब पूरा दारोमदार सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर आ गया है. यदि सुप्रीम कोर्ट CoC के गठन की प्रक्रिया या पुराने दावों पर कोई प्रतिकूल फैसला सुनाता है, तो इंकैब के अधिग्रहण और वेदांता के रेजोल्यूशन प्लान पर गंभीर कानूनी संकट मंडरा सकता है.


