चाईबासा/रांची. झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे आक्रामक और निरंतर अभियानों से लाल आतंक की कमर टूटती नजर आ रही है. पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों की बढ़ती घेराबंदी के परिणामस्वरूप प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के जोनल कमेटी सदस्य और 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली सलूका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मरु उर्फ डांगिल उर्फ विक्रम उर्फ तुबई उर्फ जयराम ने दो सक्रिय महिला माओवादियों पिंकी और कोदोमुनी के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है.
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद बिखरा माओवादी नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम के सोनुवा क्षेत्र का निवासी सलूका कायम लंबे समय से संगठन में शीर्ष माओवादी नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा के दस्ते में बेहद सक्रिय था. हाल ही में एक करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद से सलूका कायम गहरे तनाव में था और संगठन में लगातार अलग-थलग पड़ रहा था. सुरक्षित ठिकानों के अभाव, रसद आपूर्ति ठप होने और पुलिस के सटीक खुफिया नेटवर्क के चलते उसके पास मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.
दो इनामी महिला सदस्य भी मुख्यधारा में लौटीं
सलूका कायम के साथ सरेंडर करने वाली महिला नक्सलियों में 1 लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी और पिंकी शामिल हैं. कोदोमुनी के खिलाफ टोंटो थाना क्षेत्र में हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और यूएपीए सहित 5 गंभीर मामले दर्ज हैं. वहीं पिंकी पर गोईलकेरा इलाके में वन विभाग के विश्रामगृह को आईईडी से उड़ाने समेत 8 नक्सली घटनाओं में संलिप्तता का आरोप है.
96 कांडों का आरोपी था सलूका कायम
सलूका कायम के आपराधिक इतिहास की बात करें तो उसके खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम के विभिन्न थानों (सोनुवा, गोईलकेरा, टोंटो, टेबो आदि) में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने, आईईडी ब्लास्ट, जवानों पर हमले, लेवी वसूली और निर्माण मशीनों को फूंकने जैसे कुल 96 आपराधिक मामले दर्ज हैं. हाल के महीनों में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियानों ने पोड़ाहाट और सारंडा-कोल्हान में माओवादियों की सामानांतर गतिविधियों को पूरी तरह बेअसर कर दिया है.
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का दिख रहा असर
झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति (Surrender & Rehabilitation Policy) और सुरक्षा बलों के भारी दबाव के बीच लगातार नक्सली हिंसा छोड़ रहे हैं. आत्मसमर्पण करने वाले इन तीनों उग्रवादियों को नीति के तहत तय आर्थिक सहायता, कानूनी राहत और पुनर्वास की सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों को नया जीवन शुरू करने का अवसर दिया जाएगा, जबकि हथियार न डालने वाले नक्सलियों के खिलाफ कठोर अभियान जारी रहेगा.


