- RP के पत्र अथवा वेदांता के प्रस्ताव में ऑनरोल कर्मचारियों को सेवा निरंतर रखने का नहीं है वादा, ग्रेच्यूटी पूर्ण भुगतान के दावे की राशि से असंतोष
- फर्जी पत्राचार मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी, फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रहे मजदूर नेता
जमशेदपुर. केबुल कंपनी (INCAB Industries Limited) के हजारों कर्मचारियों और मजदूरों के जीवन और हक-हकूक पर अनिश्चितता के काले बादल एक बार फिर गहरा गए हैं. एक तरफ जहां कर्मचारी दिन-रात अपने बैंक खातों की तरफ उम्मीद भरी नजरों से ताक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी असली निगाहें 5 अगस्त को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में होने वाली बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिकी हुई हैं.
कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के गठन और NCLT के फैसलों के खिलाफ NCLAT में दी गई चुनौती के साथ-साथ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के बकाये दावों पर अदालत का रुख क्या होता है, इस ओर कर्मचारियों की नजरें टिकी हैं. यही से यह तय होना है कि केबुल कर्मियों को उनका सही हक मिलेगा या उनके साथ एक और छल होगा. इस बीच समाधान पेशेवर (RP) पंकज कुमार टिबरेवाल की कार्यशैली और तथाकथित वेदांता प्रबंधन के रवैये को लेकर आंदोलित कर्मचारी नेताओं और मजदूरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.
बैंक खातों में पैसों की ‘ड्रॉप’ और लेटर का क्या है ‘भ्रम जाल’
कंपनी के अधिग्रहण और बकाये के नाम पर वर्तमान में चल रही प्रक्रिया ने कर्मचारियों के बीच राहत देने के बजाय भारी भ्रम पैदा कर दिया है. शहर में चर्चा है कि टेकओवर के नाम पर कुछ चुनिंदा कर्मियों के खातों में अचानक पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, जबकि एक बड़े वर्ग को RP कार्यालय की ओर से दोबारा ‘अकाउंट डिटेल’ भेजने के लिए पत्र थमा दिए गए हैं.
इस विभेदकारी प्रक्रिया से कर्मचारी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि जब सभी कर्मचारियों का डाटाबेस और क्लेम एक ही CIRP प्रक्रिया के तहत दर्ज हुआ था, तो भुगतान और पत्राचार में यह पक्षपात और दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है ?
‘शपथपत्र पहले से जमा, फिर यह बहानेबाजी क्यों?’ – यूके शर्मा का तीखा हमला
केबुल कर्मियों के हक और बकाये के लिए दशकों से कानूनी व मैदानी संघर्ष लड़ रहे वरिष्ठ मजदूर नेता यूके शर्मा ने RP की पूरी पहल को संदेहास्पद और कर्मचारियों के साथ ‘बड़ा धोखा’ करार दिया है.

यूके शर्मा का कहना है:
“कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के दौरान ही सभी ऑनरोल व सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने नियमानुसार शपथपत्र (Affidavit) के साथ अपने बकाया का दावा RP को सौंपा था. उन दावों में बैंक खाता संख्या, IFSC कोड, पैन कार्ड और आधार सहित तमाम जरूरी दस्तावेज संलग्न थे. आज सालों बाद उसी बकाया पर क्लेम स्वीकृत करने वाले RP द्वारा ‘अकाउंट डिटेल’ मांगना आश्चर्च की बात है. यह कर्मचारियों को उलझाकर समय बिताने (Stalling Tactic) और मामले को लटकाने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है.”
वेदांता का कौन सा ‘अदृश्य’ प्रबंधन? सामने आने से क्यों कतरा रहे अधिकारी?
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि NCLT के आदेशों और कॉरपोरेट गाइडलाइंस का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. कंपनी के अधिग्रहण का दावा तो सोशल मीडिया और बिना तारीख वाले पत्रों में बड़े-बड़े अक्षरों में किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर वेदांता प्रबंधन का कोई भी अधिकृत प्रतिनिधि आज तक कर्मचारियों के सामने नहीं आया है.
मजदूरों का कहना है कि यदि अधिग्रहण पारदर्शी और वैध है, तो वेदांता का प्रबंधन सामने आकर एक आम सभा (Town Hall) या वार्ता क्यों नहीं करता, ताकि कर्मचारी अपने बकाये वेतन, सेवा निरंतरता और भविष्य से जुड़े सवालों का सीधा जवाब पा सकें? पर्दे के पीछे से कागजी खेल खेलकर मजदूरों की बेचैनी को लगातार क्यों बढ़ाया जा रहा है?
RP और ‘तथाकथित’ वेदांता अधिकारियों पर दर्ज होगी FIR!
RP पंकज कुमार टिबरेवाल के नाम से वायरल हो रहे उस पत्र ने भी आग में घी डालने का काम किया है, जिसमें न तो कोई पत्रांक संख्या (Ref No.) दर्ज है और न ही कोई तारीख (Date). मजदूर नेताओं ने इसे एक गंभीर कानूनी खामी और ‘जालसाजी का षड्यंत्र’ करार दिया है.
कई मजदूर नेताओं का कहना है कि बिना किसी आधिकारिक मुहर, पत्रांक व तारीख के बैंक डिटेल मांगना या टेकओवर का ढिंढोरा पीटना कानून की नजर में संदिग्ध है. ऐसे में अब RP पंकज कुमार टिबरेवाल और वेदांता के तथाकथित फर्जी व अनधिकृत प्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने और कठोर कानूनी कार्रवाई (Legal Action) की पहल करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है.
5 अगस्त को NCLAT में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ की उम्मीद
केबुल कंपनी के संघर्षरत मजदूरों के लिए 5 अगस्त की तारीख करो या मरो जैसी बन चुकी है. NCLAT में CoC गठन की वैधता की सुनवाई होगी. उसके बाद अन्य तिथि को EPFO दावों की सुनवाई होनी है. ऐसा माना जा रहा है इस अहम सुनवाई में NCLT के आदेशों पर चल रही बहस पर विराम लग जायेगा. अगर CoC गठन अवैध घोषित हुआ तो वेदांता का चयन भी खटाई में पड़ जायेगा.
यूके शर्मा के अनुसार:
“हमारा पूरा ध्यान और भरोसा 5 अगस्त को NCLAT में होने वाली सुनवाई पर केंद्रित है. अदालत के कटघरे में ही RP और तथाकथित वेदांता की मनगढ़ंत कहानी का दूध का दूध और पानी का पानी होगा. तब तक कर्मचारी किसी भी तरह के फर्जी पत्राचार या गुमराह करने वाले माहौल के झांसे में न आएं. जो लोग भ्रम फैलाकर मजदूरों के हक पर डाका डालना चाहते हैं, उन्हें अदालत के जरिए करारा जवाब दिया जाएगा.”
फिलहाल, जमशेदपुर की केबुल टाउनशिप में तनाव, उम्मीद और आक्रोश का मिला-जुला माहौल है. कर्मचारी अपने-अपने खातों के अपडेट्स चेक करने के साथ-साथ 5 अगस्त का इंतजार कर रहे हैं, जहां केबुल कंपनी से जुड़े हजारों परिवारों के भविष्य की दिशा तय होनी है.



