- मीडिया चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में पकड़ा गया सालों से चल रहा पार्सल लीज ओवरलोडिंग का खेल
- गोलमाल और राजस्व नुकसान के लिए सीनियर डीसीएम पर बढ़ा सीपीएस पर एक्शन लेने का दबाव
- सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी की पसंद हैँ अमित चौधरी, पिछले दरवाजे से की गयी थी पोस्टिंग !
जमशेदपुर. अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस के लीज पार्सल कोच में 2 टन ओवरलोडिंग घोटाले की मीडिया स्टिंग से चक्रधरपुर रेल मंडल में हड़कंप मचा हुआ है. यह माना जा रहा है कि इस घोटाले से रेलवे को लाखों रुपये के राजस्व (भाड़े) का सीधा नुकसान हुआ है. इस पूरे खेल में टाटानगर के पार्सल सुपरवाइजर अमित चौधरी तो रडार पर हैं ही, लेकिन अब इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले राजस्व के नुकसान के लिए सीनियर डीसीएम (Senior DCM) आदित्य चौधरी अपनी जवाबदेही से कैसे बच सकते हैं?
रेलवे सूत्रों और जानकारों का कहना है कि सिर्फ एक पार्सल सुपरवाइजर के बूते पर पौने दो टन (1,865 किलो) माल बिना बुकिंग के धड़ल्ले से ट्रेन में आ जाए और बीच रास्ते में अनलोड भी होने लगे, यह नामुमकिन है. मंडल के वाणिज्य विभाग का मुखिया होने के नाते पूरे पार्सल सिस्टम और लीज वैनों के औचक निरीक्षण की जिम्मेदारी सीनियर डीसीएम की होती है.
इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ किसी आंतरिक जांच में नहीं, बल्कि एक मीडिया चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद हुआ है. वीडियो सबूत सामने आने के बाद अब सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी के पास आंखें मूंदने का कोई रास्ता नहीं बचा है. ऐसा माना जा रहा है कि रेल मंत्रालय और जोनल मुख्यालय (SER) से भी इस वित्तीय नुकसान को लेकर जवाब-तलब किया जा सकता है.
यही कारण है कि सीनियर डीसीएम खुद को पाक-साफ दिखाने और विभाग की साख बचाने के लिए पार्सल सुपरवाइजर अमित चौधरी और अन्य संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें हटाने का निर्णय ले सकते हैं. यहां दिलचस्प बात है कि टाटानगर पार्सल सुपरवाइजर अमित चौधरी की पोस्टिंग सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने कंट्रोल आदेश पर थी, वह उनकी पंसद माने जाते है और लगातार हो रही अनियमितताओं पर भी उन्होंने आंख मूंद रखी है.
हालांकि फिलहाल सीनियर डीसीएम के निर्देश पर एसीएम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. लेकिन देखना यह होगा कि क्या जांच सिर्फ छोटे कर्मचारियों को ‘बलि का बकरा’ बनाकर ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी, या फिर इस पूरे नेक्सस को तोड़ा जाएगा जिसने रेलवे के खजाने को सीधे तौर पर लाखों की चपत लगाई है.
कागजों में 170 किलो, बोगी में निकला 2 टन माल
पार्सल के मैनिफेस्टों में पार्सल का कुल वजन महज 170 किलोग्राम (17 पैकेट) ही टाटानगर में उतारने की बात दर्ज थी. जबकि टाटानगर स्टेशन पर 17 से अधिक पैकेट उतार दिये गये. इसकी भनक पहले से मीडिया को हो गयी थी और एक चैनल ने पूरे अनलोडिंग का स्टिंग कर दिया. इसके बाद जांच में यह बात समाने आयी कि 170 किलो की जगह लगभग 2,035 किलोग्राम (लगभग 2 टन) माल लीज वैन से उतारा गया जो हावड़ा के लिए बुक था.
सीनियर डीसीएम सख्त, एसीएम कर रहे जांच
चक्रधरपुर डिवीजन के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. रेलवे सूत्रों के अनुसार बिना स्थानीय पार्सल विभाग और पार्सल सुपरवाइजर की मिलीभगत या घोर लापरवाही के इतना बड़ा ओवरलोडिंग का खेल मुमकिन नहीं है. इस बात की जांच की जा रही है कि यह खेल कब से चल रहा था और रेलवे को अब तक कितने लाख रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा चुका है. दोषी सुपरवाइजर और कर्मचारियों को जल्द ही सस्पेंड या पद से हटाकर उन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी है.
बीच रास्ते में अनलोडिंग : टैक्स और भाड़े की दोहरी चोरी
टाटानगर स्टेशन पर पार्सल लीज बोगी से 2,035 किलोग्राम (लगभग 2 टन) माल उतारा गया जो हावड़ा तक जाना था. यहां जांच में करीब 1,865 किलो (पौने दो टन) माल बिना बुकिंग के पाया गया. बताया जाता है किअगर यह माल टाटा से किसी तरह हावड़ा भेज दिया जाता तो रेलवे को -भरकम वजन के बदले मिलने वाले वास्तविक भाड़े और जुर्माने का भारी नुकसान होता।
बड़ा सवाल: इस घटना ने रेलवे के पार्सल लीजिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर वजन की हेरफेर सुरक्षा और विजिलेंस की आंखों में धूल झोंककर कैसे होती रही?
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