- फर्जी वोटर सूची और नियमों के उल्लंघन का आरोप, सड़क पर हुआ उत्कल एसोसिएशन का चुनाव, सड़क किनारे बैलेट बॉक्स
जमशेदपुर. साकची स्थित उत्कल एसोसिएशन के 25 सदस्यीय कार्यसमिति का चुनाव रविवार को भारी हंगामे और विरोध-प्रदर्शन के बीच संपन्न हुआ. सुबह से ही शुरू हुए तीखे विरोध के कारण माहौल पूरी तरह गरमा गया. विपक्षी गुट के सदस्यों ने एसोसिएशन के मुख्य प्रवेश द्वार को पूरी तरह जाम कर जमकर नारेबाजी की और मतदान का बहिष्कार किया. विवाद इतना बढ़ गया कि मतदान की प्रक्रिया मुख्य परिसर के अंदर न होकर बाहर सड़क किनारे करानी पड़ी.
सुबह करीब 12:30 बजे विपक्षी सदस्यों ने मुख्य गेट को बंद कर प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसके बाद बाहर ही मतदान स्थल बनाकर प्रक्रिया शुरू की गई, जो शाम 4:30 बजे तक चली.
बायलॉज के उल्लंघन और फर्जी मतदाताओं का आरोप
विपक्षी सदस्यों का नेतृत्व कर रहे अशोक कुमार सामंतों ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कमेटी द्वारा संस्था के बायलॉज का खुला उल्लंघन किया गया है. 28 जुलाई को हुई आम सभा में ‘साहित्य’ पत्रिका का विमोचन किया गया था, जिसमें 109 नए सदस्यों की सूची जारी की गई थी, लेकिन वोटर लिस्ट में उनका कोई उल्लेख नहीं किया गया.
अशोक कुमार सामंतों ने बताया कि नियमानुसार वर्ष 2023 तक के केवल 873 आजीवन सदस्यों को ही मतदान का अधिकार मिलना चाहिए था, जबकि चुनाव अधिकारियों ने 971 मतदाताओं की फर्जी सूची जारी कर दी. विरोध दर्ज कराने वाले पक्ष का कहना था कि पारदर्शी जांच होने तक चुनाव स्थगित रखा जाना चाहिए था.
चुनावी नतीजे: डॉ. श्रीधर प्रधान अध्यक्ष और जजाती केशरी महासचिव चुने गए
तमाम विरोध, हंगामे और सड़क पर संपन्न हुई मतदान प्रक्रिया के बाद शाम को चुनाव परिणामों की घोषणा की गई. कार्यसमिति सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें:
- डॉ. श्रीधर प्रधान को एक बार फिर अध्यक्ष चुना गया.
- जजाती केशरी प्रधान को महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई.
- सुलभ पात्र को सह-सचिव और मनीष दास को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया.
संस्था के कुल 971 पंजीकृत मतदाताओं में से महज 301 लोगों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसमें से 8 मत अवैध (रद्द) पाए गए और कुल वैध मतदान 293 दर्ज किया गया. विजेता प्रत्याशी डॉ. श्रीधर प्रधान को 275 वोट मिले.
विपक्ष के 53 में से 27 उम्मीदवारों द्वारा अंतिम समय में चुनाव का बहिष्कार किए जाने के कारण चुनाव मैदान में केवल 26 प्रत्याशी ही शेष रह गए थे. हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया और नई कार्यसमिति का गठन पूरा हुआ.


