अभय तिवारी ने माना कि केवल प्रतियोगी परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर हुई बहालियों में भी 9 लाख रुपये का कमीशन उसने बटोरा था.
रांची. झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों में व्याप्त भ्रष्टाचार का दायरा अब दायरा बढ़ाता ही जा रहा है. जेपीएससी (JPSC) मेधा घोटाले में गिरफ्तार बिचौलिए व एजेंसी के प्रतिनिधि अभय तिवारी (उर्फ मनोज तिवारी) द्वारा सीआईडी (CID) के समक्ष किए गए नए खुलासे ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अभय तिवारी ने स्वीकार किया है कि केवल प्रतियोगी परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर हुई बहालियों में भी 9 लाख रुपये का कमीशन बटोरा गया था.
स्वास्थ्य विभाग की संविदा भर्तियों में भ्रष्टाचार का सच
अभय तिवारी के बयान के अनुसार, वर्ष 2023 में जब वह ‘जेएसआर एजेंसी’ में प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रहा था, तब स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही थी. बायोमेट्रिक जांच, उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन और अन्य तकनीकी सेवाओं के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और कमीशनखोरी की गई.
अनुबंध आधारित भर्तियों में योग्यता और पारदर्शिता को दरकिनार कर केवल आर्थिक लाभ और कमीशन को प्राथमिकता दी गई. स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में भ्रष्टाचार और कदाचार का यह खेल उजागर होने से अब राज्य सरकार की साख और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
राज्य में बहालियों में भ्रष्टाचार का खुलता ‘नया अध्याय’
अभय तिवारी के परत-दर-परत बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड में नियुक्तियों की प्रणाली में भ्रष्टाचार का एक सुव्यवस्थित नेटवर्क काम कर रहा था:
- स्वास्थ्य विभाग से जेएसएससी तक का नेटवर्क: स्वास्थ्य विभाग में 9 लाख का कमीशन कमाने के बाद अभय तिवारी ने जेएसएससी (JSSC) में टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी को इंपैनल कराया.
- अधिकारियों को रिश्वत: इस काम के लिए उसने 5 लाख रुपये स्वयं रखे और 5 लाख रुपये जेएसएससी के सहायक सेक्शन अफसर प्रेम कुमार को जेएसएससी भवन के बाहर दिए.
- वेबेल एजेंसी और पर्चा लीक कनेक्शन: टीडीपीएल के हटने के बाद जब ‘वेबेल एजेंसी’ को जिम्मा सौंपा गया, तो अभय तिवारी उससे भी जुड़ गया. इसी वेबेल एजेंसी पर जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने का गंभीर आरोप है.
यह पूरी कड़ी दर्शाती है कि बिचौलियों, एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की साठगांठ से हर स्तर पर युवाओं के भविष्य का सौदा किया जा रहा था.
सरकार के सामने खड़ी हुई नई मुश्किलें
स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर हुई नियुक्तियों में धांधली की बात सामने आने से राज्य सरकार के लिए चौतरफा संकट पैदा हो गया है:
- सफाई देना कठिन: अब तक सरकार केवल परीक्षा एजेंसियों की गड़बड़ी बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अब सरकारी विभागों (स्वास्थ्य विभाग) के भीतर संविदा बहालियों में सीधा कमीशन का मामला आने से प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं.
- विपक्ष का बढ़ता हमला: प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की बहालियों में भ्रष्टाचार के खुलासे से विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है.
- युवाओं में गहराता असंतोष: राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि संविदा से लेकर स्थायी नौकरियों तक, हर जगह बिना कमीशन और धांधली के पारदर्शी बहाली असंभव हो चुकी है.
अभय तिवारी के खुलासों ने झारखंड में भर्तियों में जारी भ्रष्टाचार के एक नए और खौफनाक अध्याय को उजागर कर दिया है. सीआईडी की आगे की जांच में यदि और विभागों के नाम सामने आते हैं, तो सरकार के लिए इस राजनीतिक और प्रशासनिक संकट से निपटना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.


