रांची. झारखंड की बहुचर्चित जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और व्यापक स्तर पर हुई धांधलियों की सीबीआई (CBI) जांच कराए जाने तथा कुछ विवादित परीक्षाओं को पूरी तरह से रद्द करने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट में आगामी 5 अक्टूबर को महत्वपूर्ण सुनवाई तय की गई है.
उधर, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने शुक्रवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ( जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच के क्रम में एक आरोपित को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपित की पहचान मिथिलेश कुमार पांडेय के रूप में हुई है. वह बोकारो जिले के हरला का रहने वाला बताया गया है.
सीआईडी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मिथिलेश पांडेय प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी के संचालक मिथिलेश सिंह का करीबी है. जांच में उसके जरिए कथित तौर पर कई अभ्यर्थियों से पैसे लेकर प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद सीआईडी की टीम उससे पूछताछ कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट में आंशिक सुनवाई के बाद मिला नया दिन
यह पूरा कानूनी मामला सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता ने राज्य की इन प्रमुख चयन आयोगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. हाल ही में, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की विशेष अदालत में इस मामले पर प्रारंभिक और आंशिक सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों के तर्कों को समझने के बाद अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है. अब इस आगामी सुनवाई के दौरान याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदुओं, गंभीर आरोपों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विस्तृत विचार-विमर्श होने की पूरी संभावना जताई जा रही है.
झारखंड हाईकोर्ट में भी 7 अक्टूबर को होगी सुनवाई
एक तरफ जहां देश की सबसे बड़ी अदालत इस मामले पर कड़ा रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड हाईकोर्ट में भी इसी तरह के मामलों से जुड़े विषयों पर कानूनी कार्यवाही समानांतर रूप से चल रही है. झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की गई है. इस प्रकार, मात्र दो दिनों के अंतराल पर देश के सर्वोच्च न्यायालय और राज्य के उच्च न्यायालय दोनों जगह इन परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर बड़ी सुनवाई होनी है. इन दोनों बड़े अदालती घटनाक्रमों पर पूरे राज्य के युवाओं, अभ्यर्थियों और राजनीतिक गलियारों की गहरी नजर टिकी हुई है.
सीबीआई जांच और परीक्षाएं रद्द करने की मुख्य मांगें
याचिकाकर्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई मुख्य मांग में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित की गई विभिन्न परीक्षाओं की उच्चस्तरीय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराना शामिल है. इसके अलावा, याचिका में यह भी पुरजोर मांग उठाई गई है कि जिन परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और धांधलियां पाई गई हैं, उन परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए ताकि योग्य और मेहनतकश युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके.
आगामी 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट और उसके ठीक बाद 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट में होने वाली इन सुनवाइयों के परिणामों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अदालतें इस संवेदनशील मामले में आगे क्या दिशा-निर्देश जारी करती हैं.



