- एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के 6 ठिकानों पर छापेमारी में आधा किलो सोना और 21 बैंक खाते मिले,
सासाराम. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सासाराम में तैनात लघु सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) अरविन्द कुमार चौधरी के भ्रष्टाचार के काले साम्राज्य का पर्दाफाश किया है. महज 12 साल की सरकारी नौकरी में इंजीनियर अरविन्द ने आय के वैध स्रोतों से लगभग 85% अधिक यानी करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति खड़ी कर ली. EOU की टीम ने दानापुर, सासाराम, डेहरी, मुजफ्फरपुर और बांका समेत उनके 6 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिससे प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है.
सास के खाते में लेता था घूस की रकम
EOU की जांच में भ्रष्टाचार का एक अनोखा और चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है. इंजीनियर अरविन्द कुमार चौधरी रिश्वत की मोटी रकम सीधे अपने या अपनी पत्नी के नाम पर न लेकर अपनी सास मोरा जायसवाल के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाता था. EOU की प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपी इंजीनियर के खिलाफ 1.20 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन छापेमारी के दौरान बेनामी संपत्तियों और नकदी का जो ब्योरा मिला, उसने अधिकारियों को भी दंग कर दिया.
6 ठिकानों पर छापेमारी, क्या-क्या मिला?
EOU की अलग-अलग टीमों ने जब गुरुवार को एक साथ अरविन्द चौधरी के ठिकानों को खंगाला, तो अकूत काली कमाई का खुलासा हुआ:
- नकद और आभूषण: छापेमारी के दौरान लगभग 9 लाख रुपये नकद और आधा किलो से अधिक सोने के कीमती गहने बरामद किए गए.
- बैंक खाते व लॉकर: आरोपी और उनके परिजनों के नाम पर 21 बैंक खाते और 17 बीमा पॉलिसियों के दस्तावेज मिले हैं. इसके अलावा बैंक लॉकर की जानकारी भी सामने आई है, जिसकी तलाशी कोर्ट की अनुमति के बाद ली जाएगी.
- अचल संपत्तियों का अंबार: दानापुर के आशियाना इलाके में 2 लग्जरी फ्लैट, भागलपुर में कीमती जमीन, बांका और दानापुर में पत्नी मीरा रानी व अन्य रिश्तेदारों के नाम पर कई भूखंडों (प्लाट्स) और फ्लैट्स के दस्तावेज जब्त किए गए हैं.
12 साल की सेवा में 10 करोड़ का साम्राज्य
जांच में अनुमान लगाया गया है कि इंजीनियर अरविन्द ने अपने 12 साल के सेवाकाल में लगभग 10 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति बनाई है. EOU के अधिकारियों का कहना है कि आय के ज्ञात स्रोतों से तुलना करने पर यह संपत्ति 85.05 प्रतिशत अधिक पाई गई है.
लघु सिंचाई विभाग में जारी विकास योजनाओं और सरकारी निविदाओं में कमीशनखोरी के जरिए यह अथाह संपत्ति जुटाए जाने की आशंका है. EOU की टीम फिलहाल जब्त किए गए सभी दस्तावेजों, फिक्स डिपॉजिट (FD) और प्लॉट के कागजातों की गहनता से पड़ताल कर रही है. आने वाले दिनों में बैंक लॉकर खुलने के बाद इस काली कमाई के आंकड़े में और बड़ा इजाफा होने की पूरी संभावना है.
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