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Home » 1989 में Tata Sons के शेयर हस्तांतरण की शिकायत सबंधी जांच बंद की, जानें क्या है मामला?
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1989 में Tata Sons के शेयर हस्तांतरण की शिकायत सबंधी जांच बंद की, जानें क्या है मामला?

Ocean News DeskBy Ocean News DeskSeptember 4, 2026
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New Delhi. महाराष्ट्र चैरिटी आयुक्त ने नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से दिवंगत नवल एच. टाटा को 1989 में टाटा संस के 833 शेयर के हस्तांतरण की जांच की मांग वाली शिकायत को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि यह लेनदेन उस समय लागू कानून के अनुरूप था। टाटा ट्रस्ट्स ने बृहस्पतिवार को बयान में यह जानकारी दी। दो सितंबर को दिए गए आदेश में 10 जून को नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (एनआरटीटी) के न्यासी विजय सिंह द्वारा दायर शिकायत का निस्तारण किया गया। इसमें मौजूदा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के पिता नवल एच. टाटा को करीब चार दशक पुराने शेयर हस्तांतरण की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी।

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा, ‘‘टाटा ट्रस्ट्स को महाराष्ट्र राज्य, मुंबई के चैरिटी आयुक्त का दो सितंबर, 2026 का आदेश मिला है जिसमें एनआरटीटी के न्यासी विजय सिंह द्वारा 10 जून, 2026 को ईमेल के जरिये दी गई शिकायत का निपटारा किया गया है। इस शिकायत में 1989 में एनआरटीटी से टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के 833 शेयर नवल एच. टाटा को हस्तांतरित किए जाने की जांच की मांग की गई थी। बयान में कहा गया, ‘‘टाटा ट्रस्ट्स का यह दावा सही साबित हुआ है कि शेयर के हस्तांतरण से जुड़े आरोप निराधार, बिना सबूत के और दुर्भावनापूर्ण लगाए गए थे। ये आरोप टाटा ट्रस्ट्स को बदनाम करने की एक दुर्भावनापूर्ण और सोची समझी साजिश का हिस्सा थे। इसका एकमात्र उद्देश्य टाटा ट्रस्ट्स की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था। यह ऐसी संस्था है, जिसने 130 से अधिक वर्षों से देश की सेवा की है और सार्वजनिक विश्वास, जवाबदेही तथा नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों को लगातार बनाए रखा है।’’

टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, शिकायत, ट्रस्ट के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद आयुक्त ने निष्कर्ष निकाला कि महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत आगे किसी जांच की जरूरत नहीं थी। बयान के अनुसार, आयुक्त ने पाया कि वैधानिक आवश्यकताओं के कारण इन शेयर की बिक्री जरूरी थी और शेयर हस्तांतरण उचित दस्तावेजों पर आधारित था।

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि ट्रस्ट को दी गई राशि का निर्धारण आयकर विभाग के संपत्ति कर आयुक्त द्वारा सहमत मूल्यांकन के आधार पर किया गया था और ट्रस्ट को इस लेनदेन से लाभ हुआ था, जो 31 मार्च, 1989 के उसके बही-खाते में दर्ज था। इसमें यह भी पाया गया कि शेयर इस शर्त के साथ हस्तांतरित किए गए थे कि उन्हें किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचा जाएगा और वे प्राप्तकर्ता के परिवार के पास ही रहेंगे।
बयान में कहा गया कि आयुक्त ने निष्कर्ष निकाला कि यह हस्तांतरण उस समय लागू कानून के अनुरूप किया गया था।

यह विवाद इस साल उस समय फिर सामने आया जब आरोप लगाए गए कि सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के पास रखे गए शेयर को नवल टाटा को व्यक्तिगत हैसियत से पर्याप्त प्रतिफल, न्यासियों की मंजूरी या जरूरी दस्तावेजों के बिना हस्तांतरित किया गया था। टाटा ट्रस्ट्स ने इन आरोपों से इनकार किया था।

find out what is the case? In 1989 Tata Sons stopped investigating share transfer complaints
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