चक्रधरपुर. रेल मंडल के अंतर्गत भालूलता और बिसरा रेलवे स्टेशनों के बीच हावड़ा-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस (20871) एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई. लोको पायलट की सतर्कता और सूझबूझ के कारण ट्रेन में सवार यात्री सुरक्षित रहे.
- बुधवार सुबह 11:30 बजे (पहिए में लोहे का टुकड़ा फंसा): ट्रेन जैसे ही भालूलता और बिसरा स्टेशन के बीच पहुंची, इंजन के पहिए के पास लोहे का एक टुकड़ा आ गया. कुचलने के बाद यह लोहे का टुकड़ा C-1 कोच के बाएं तरफ के पहिए में बुरी तरह फंस गया. इसके कारण ट्रेन में तेज और असामान्य झटके लगने लगे, जिसे महसूस करते ही लोको पायलट ने आपातकालीन स्थिति समझते हुए तुरंत ट्रेन रोक दी.
- दोपहर 12:20 बजे (बिसरा स्टेशन आगमन): रेलवे के तकनीकी कर्मचारी तुरंत सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे. शुरुआती जांच के बाद ट्रेन को बेहद धीमी गति से चलाकर बिसरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर सुरक्षित लाया गया.
- तकनीकी मरम्मत और सुधार कार्य: कैरेज एंड वैगन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पहिए में फंसे लोहे के टुकड़े को बाहर निकाला. इस पूरी प्रक्रिया के कारण मुख्य रेल रूट लगभग तीन घंटे तक बाधित रहा.
- यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था: रेलवे प्रशासन ने देरी को देखते हुए वंदे भारत के यात्रियों को साउथ बिहार एक्सप्रेस के जरिए उनके गंतव्य राउरकेला तक पहुंचाया. इसके अलावा टाटानगर से हावड़ा जाने वाले यात्रियों के लिए एक विशेष ट्रेन का संचालन भी किया गया.
- वापसी ट्रेन पर असर: इस घटना का असर राउरकेला से हावड़ा लौटने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पर भी पड़ा. दोपहर 1:30 बजे रवाना होने वाली इस ट्रेन को दूसरे रेक के साथ करीब दो घंटे की देरी से (अपराह्न 3:30 बजे) रवाना किया जा सका.
सुरक्षा पर उठे सवाल और जांच के आदेश
पटरियों पर लोहे का टुकड़ा कैसे आया और क्या ट्रेन की रवानगी से पहले ट्रैक गश्त में लापरवाही हुई थी, इन सवालों को लेकर रेलवे सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं. चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया ने अधिकारियों के साथ घटनास्थल का जायजा लिया है और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं.




