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Home » NEPAL : हिमालय का सीना चीरकर आया प्रलय का सैलाब, भोटेकोशी-त्रिशूली में मौत की दहाड़, 160 शव बरामद, सैकड़ों लोग लापता
देश/दुनिया

NEPAL : हिमालय का सीना चीरकर आया प्रलय का सैलाब, भोटेकोशी-त्रिशूली में मौत की दहाड़, 160 शव बरामद, सैकड़ों लोग लापता

Ocean News DeskBy Ocean News DeskAugust 27, 2026
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  • तिब्बत में ग्लेशियर में हिमस्खलन से भोटेकोशी नदी में आई बाढ़, बिहार-यूपी में अलर्ट
  • एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त, बहुमंजिला इमारतें, पुल व लोग बहते चले गए
  • भोटेकोशी के पानी से त्रिशूली नदी भी उफनाई, यूपी-बिहार में बाढ़ की आशंका से अलर्ट
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 400 श्रद्धालु संपर्क से बाहर, युद्ध स्तर पर खोज अभियान शुरू

इस अप्रत्याशित कुदरती आफत में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग इस समय ज़िंदगी और मौत के बीच लापता हैं. इस भयावह आपदा की सबसे दर्दनाक कड़ी यह है कि गायब लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 133 भारतीय श्रद्धालु और 37 प्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं.

काठमांडू/रसुवागढ़ी ग्राउंड जीरो

तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के शांत और खूबसूरत पहाड़ी इलाके बुधवार की सुबह एक ऐसी खौफनाक चीख में बदल गए, जिसकी गूंज से पूरा हिमालय कांप उठा. बिना किसी पूर्व चेतावनी या घनघोर बारिश के, ऊंचे पहाड़ों पर हिमखंड टूटने और भूस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में पानी और मलबे का ऐसा भयावह सैलाब उमड़ा कि इंसान, कंक्रीट की बहुमंजिला इमारतें, विशालकाय पुल और सड़कें सब ताश के पत्तों की तरह ढहकर उफनती लहरों में समा गए.

इस अप्रत्याशित कुदरती आफत में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग इस समय ज़िंदगी और मौत के बीच लापता हैं. इस भयावह आपदा की सबसे दर्दनाक कड़ी यह है कि गायब लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 133 भारतीय श्रद्धालु और 37 प्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं.

30 मिनट में 30 फीट ऊपर उठी लहरें, ताश के पत्तों की तरह ढहे कंक्रीट के स्ट्रक्चर

30 मिनट में 30 फीट उछलीं नदियाँ, ताश के पत्तों की तरह ढहे कंक्रीट के स्ट्रक्चरग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, तबाही की शुरुआत नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित लेंडे नदी और भोटेकोशी के संगम से हुई. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) और स्थानीय जलविज्ञान केंद्रों के शुरुआती आंकड़ों से खुलासा हुआ कि महज़ 30 मिनट के भीतर त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों का जलस्तर लगभग 9 मीटर (30 फीट) तक उछल गया.

इतनी भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और चट्टानी मलबे का मिश्रण जब 2000 फीट चौड़े पाट में प्रचंड वेग से बढ़ा, तो किनारे बसे बस्तियों को संभलने का एक मौका तक नहीं मिला.रसुवा जिले के टिमुरे, स्याप्रुबेसी और बेत्रावती जैसे इलाकों में हालात इतने भयावह थे कि लोग जब तक पानी का शोर सुनकर बाहर भागे, तब तक 40 फीट ऊँची मटमैली लहरें सुरक्षा चौकियों, वाहनों और चार-चार मंजिला इमारतों को अपने गाल में समा चुकी थीं.नेपाल-चीन सीमा व्यापार का मुख्य गढ़ माना जाने वाला रसुवागढ़ी कस्टम पॉइंट पूरी तरह तबाह हो चुका है. यहाँ तक कि नेपाल सेना और पुलिस के कई बैरक और पोस्ट भी उफनती नदी की चपेट में आ गए, जिससे कम से कम 80 सुरक्षाकर्मी खुद इस जल-प्रलय में बह गए.

मानसरोवर तीर्थयात्रियों का दर्द, 133 भारतीय और 37 NRI की तलाश में भटक रहे परिजन

पहाड़ों की इस खौफनाक विभीषिका में सबसे बड़ा संकट कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं पर टूटा है. इस यात्रा मार्ग का मुख्य ट्रांजिट हब रसुवागढ़ी और उसके आस-पास के होटल थे. बुधवार सुबह जब बाढ़ आई, तो सैकड़ों तीर्थयात्री चीन सीमा पार करने और कागजी कार्रवाई की प्रतीक्षा में टिमुरे और आसपास के इलाके में मौजूद थे.लापता 133 भारतीयों में मुख्य रूप से तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के यात्री शामिल हैं.

तमिलनाडु के 37 लोगों का जत्था भी लापता बताया जा रहा है. इसके अलावा ईशा फाउंडेशन के भी कई सदस्य सीमावर्ती इमीग्रेशन सेंटर के पास से लापता बताए गए हैं.काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और भारत के उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने आपातकालीन 24×7 हेल्पलाइन नंबर (जैसे 1070) जारी किए हैं. नदी के निचले हिस्सों में लाशें बहकर आ रही हैं. त्रिशूली नदी के मुहाने से 150 किलोमीटर दूर चितवन जिले तक अब तक 33 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जो इस आपदा के विस्तार और क्रूरता को साफ बयां करता है.

बुनियादी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त, 19 पुल बहे, 42 किमी सड़क गायब, पावर प्रोजेक्ट ठप

जमीनी मोर्चे पर बचाव अभियानों में सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी का पूरी तरह खत्म हो जाना है.पुल व सड़कें: नुवाकोट से रसुवागढ़ी सीमा चौकी को जोड़ने वाला 42 किलोमीटर लंबा मुख्य राजमार्ग नदी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया है. कम से कम 19 प्रमुख कंक्रीट और सस्पेंशन ब्रिज टूटकर गायब हो चुके हैं.हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में स्थित 13 से अधिक चालू और निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं—जिनमें रसुवागढ़ी (111 मेगावाट) और संजेन खोला शामिल हैं. तबाही की चपेट में आ गई हैं. यहाँ काम करने वाले दर्जनों मजदूर भी लापता हैं.

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर, सेना को कमान

बिहार और यूपी में अलर्टनेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपात बैठक बुलाकर प्रभावित क्षेत्रों को आपदाग्रस्त घोषित किया है और सेना व सशस्त्र पुलिस बल को 12 से अधिक हेलीकॉप्टरों के साथ तैनात किया है. हालांकि, लगातार खराब मौसम और घाटी में जमा भारी मलबे की वजह से हेलीकॉप्टरों को लैंड कराने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल सरकार को हर संभव मानवीय और आपदा राहत (NDRF) सहायता देने की घोषणा की है. भारतीय वायु सेना के विमानों के जरिए राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है.दूसरी ओर, त्रिशूली का पानी गंडक और अन्य नदियों के माध्यम से भारत की ओर बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. हिमालय के ऊपरी हिस्सों में बने अस्थायी मलबे के बांधों के टूटने का खतरा अभी भी टला नहीं है, जिससे आने वाले 48 घंटे बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं.

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