चीन ने भारतीय सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए प्रमुख भारतीय निर्माता स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज पर 7.4 प्रतिशत जबकि अक्ष ऑप्टिफाइबर और फिनोलेक्स केबल्स जैसी अन्य दिग्गज कंपनियों पर 30.6 प्रतिशत का भारी भरकम शुल्क लगाया है.
वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारतीय विनिर्माण उद्योग ने एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है. अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता और किफायती लागत के बलबूते भारतीय कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी है कि आर्थिक महाशक्ति कहे जाने वाले चीन की नींद उड़ गई है. स्थिति यह है कि घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने के लिए बीजिंग को कड़े और रक्षात्मक कदम उठाने पड़ रहे हैं.
आयात शुल्क का कड़ा शिकंजा
इस आर्थिक प्रतिद्वंद्विता के ताज़ा दौर में, चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने भारतीय सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के वास्ते एक बड़ा फैसला लिया है. ड्रैगन ने इसके आयात पर लगने वाली ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी’ (एंटी-डंपिंग शुल्क) को आगामी पांच वर्षों यानी वर्ष 2030 तक के लिए बढ़ा दिया है. एक साल तक चले गहन ‘सनसेट रिव्यू’ के बाद अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि इस भारी-भरकम कर को हटाया गया, तो चीनी बाजार में भारतीय सामानों की सुनामी आ जाएगी, जिससे स्थानीय विनिर्माताओं का टिक पाना असंभव हो जाएगा.
नवीनतम प्रावधानों के तहत, भारतीय निर्यातकों पर 7.4 प्रतिशत से लेकर 30.6 प्रतिशत तक का भारी शुल्क थोपा गया है. इस नीति के दायरे में अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग दरें तय की गई हैं. प्रमुख भारतीय निर्माता स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज पर 7.4 प्रतिशत का शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अक्ष ऑप्टिफाइबर और फिनोलेक्स केबल्स जैसी नामचीन कंपनियों पर 30.6 प्रतिशत की भारी पेनल्टी लगाई गई है. उल्लेखनीय है कि इस तरह की पाबंदियां पहली बार नहीं थोपी गई हैं; इसकी शुरुआत सबसे पहले अगस्त 2014 में हुई थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है.
भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता के कारण
चीनी खेमे में मची इस खलबली के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें हैं:
- वैश्विक मानक और किफायती मूल्य: एक दौर था जब दुनिया भर में सस्ते उत्पादों के लिए केवल चीन का एकाधिकार हुआ करता था. किंतु अब भारतीय फर्मों ने यह साबित कर दिया है कि वे न्यूनतम लागत पर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुकूल टिकाऊ उत्पाद मुहैया कराने में पूरी तरह सक्षम हैं.
- मजबूत अनुसंधान एवं विकास (R&D): 5G क्रांति और अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के इस युग में भारतीय उद्योगों ने महज़ नकल करने के बजाय मौलिक नवाचार (इन्नोवेशन) पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये उत्पाद आज वैश्विक हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क की पहली पसंद बन चुके हैं.
भारतीय तकनीक और औद्योगिक क्षमता की इस असाधारण छलांग ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल एक उपभोग बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर आर्थिक मंचों पर एक मजबूत चुनौती पेश करने वाला देश बन चुका है.
अनिल अग्रवाल की कंपनी और अन्य निर्यातक आए जद में
इस बार भी विभिन्न भारतीय निर्यातकों के लिए कर (टैक्स) की दरें पूर्ववत नियमों के अनुसार ही रहेंगी, जो 7.4 प्रतिशत से लेकर 30.6 प्रतिशत के दायरे में तय की गई हैं. इन प्रभावित कंपनियों में स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (Sterlite Technologies) शामिल है, जिस पर 7.4% की दर लागू है, जबकि अक्ष ऑप्टिफाइबर और फिनोलेक्स केबल्स के लिए यह दर 30.6% निर्धारित की गई है। आपको बता दें कि स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज देश के दिग्गज उद्योगपति और अरबपति अनिल अग्रवाल से जुड़ी हुई है.


