पटना. बिहार में इन दिनों चल रहे ऐतिहासिक भूमि सर्वे (Land Survey) के महाअभियान के बीच नीतीश सरकार ने प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल ला दिया है. राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक ही झटके में रिकॉर्ड 3,268 राजस्व कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण (Transfer) और पदस्थापन कर दिया है. इस भारी फेरबदल ने न सिर्फ विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि सालों से एक ही जगह पर जमे पैरवीकारों और ‘पसंदीदा सीटों’ के खेल को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है.
पहली बार ‘ऑनलाइन कंप्यूटर मॉडल’, खत्म हुई पैरवी संस्कृति
इस ऐतिहासिक तबादले की सबसे खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया को पहली बार किसी इंसानी दखल के बिना, ऑनलाइन और कंप्यूटर आधारित डिजिटल प्रणाली के जरिए अंजाम दिया गया. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की हरी झंडी के बाद जारी हुई इस सूची को तैयार करने के लिए ‘बिहार भूमि पोर्टल’ के माध्यम से सीधे कर्मचारियों से ऑनलाइन विकल्प मांगे गए थे.
इस पारदर्शी तकनीक ने ट्रांसफर-पोस्टिंग के पुराने ढर्रे और दलाली के सिंडिकेट को सीधे तौर पर चोट पहुंचाई है. विभाग ने साफ किया है कि इस डिजिटल व्यवस्था का मकसद ट्रांसफर प्रक्रिया में 100% पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, ताकि जमीन सर्वे के इस संवेदनशील समय में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या धांधली की गुंजाइश न बचे.
वरीयता और मानवीय संवेदनाओं का ख्याल
डिजिटल रैंडमाइजेशन के बावजूद इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया में मानवीय पहलुओं और प्राथमिकताओं का विशेष ध्यान रखा गया है. डेटा के मुताबिक:
- कुल स्थानांतरित कर्मियों में 3,142 पुरुष और 126 महिला कर्मचारी शामिल हैं.
- इसमें से 1,712 पुरुष और 108 महिलाओं को उनके द्वारा चुनी गई पहली प्राथमिकता (First Preference) के आधार पर तैनाती मिली है.
- 380 कर्मियों को दूसरी और 141 कर्मियों को उनकी तीसरी वरीयता के आधार पर जिला अलॉट किया गया है.
गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों, दिव्यांगों और महिला कर्मियों के पदस्थापन को विशेष प्राथमिकता दी गई है. साथ ही, 880 कर्मचारियों को उनके गृह जिले से बिल्कुल सटे (Bordering) जिलों में तैनात किया गया है ताकि कार्यप्रणाली प्रभावित न हो.
सर्वे के बीच बड़ा दांव, अब अमीन की बारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जमीन सर्वे के बीच इन कर्मचारियों को इधर से उधर करने का मुख्य उद्देश्य जिलों में सालों से बने एकाधिकार को तोड़ना है. राजस्व मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक आधारित यह मॉडल इतना सफल रहा है कि अब आने वाले दिनों में विभाग के अन्य संवर्गों में भी इसे ही लागू किया जाएगा.
इतना ही नहीं, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इसी डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शी नीति के तहत बहुत जल्द राज्य में बड़े पैमाने पर अमीन (Survey Amin) के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी. भूमि सर्वे के इस अहम दौर में सरकार का यह ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’ जमीन विवादों को पारदर्शी तरीके से सुलझाने और आम जनता को दफ्तरों के चक्करों से राहत देने की दिशा में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है.
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