नई दिल्ली. दिल्ली के जंतर-मंतर की जमीनी हकीकत इस समय बेहद संवेदनशील और चिंताजनक बनी हुई है. नीट (NEET) पेपर लीक मामले और देश की परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.
इस तपती गर्मी और बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे जारी आंदोलन ने वांगचुक के शरीर को तोड़कर रख दिया है. अनशन शुरू होने के बाद से उनका वजन 8.5 किलोग्राम गिर चुका है और उनकी मांसपेशियां तेजी से कमजोर हो रही हैं, लेकिन उनका हौसला अब भी अडिग है.
प्रशासनिक अड़चनें और कड़ा संघर्ष
जमीन पर यह लड़ाई सिर्फ भूखे रहने की नहीं, बल्कि बुनियादी हकों के लिए हर पल संघर्ष करने की है. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले चल रहे इस प्रदर्शन में बारिश से बचने के लिए एक अदद टेंट लगाने तक की अनुमति नहीं मिल रही है. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस प्रशासन के सामने हाथ-पैर जोड़ने पड़ रहे हैं ताकि अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों को भीगने से बचाया जा सके. यह स्थिति दर्शाती है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को जमीनी स्तर पर कितनी विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
विपक्ष और हस्तियों की एकजुटता
सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए देश के कई बड़े राजनेताओं और फिल्मी हस्तियों ने उनसे अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है:
अखिलेश यादव (सपा प्रमुख): उन्होंने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस निर्मम व्यवस्था के लिए किसी का भी बलिदान मायने नहीं रखता.
अरविंद केजरीवाल: उन्होंने ऐलान किया है कि वे 16 जुलाई को खुद जंतर-मंतर जाकर वांगचुक और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर अपना समर्थन देंगे.
महुआ मोइत्रा और उद्धव ठाकरे: दोनों नेताओं ने सोनम वांगचुक के जीवन को युवाओं के लिए अनमोल बताते हुए उनसे अनशन समाप्त कर लड़ाई को दूसरे तरीकों से जारी रखने की गुहार लगाई है.
सिनेमा जगत का साथ: अभिनेता ओमी वैद्य, जीनत अमान और नसीरुद्दीन शाह जैसी हस्तियों ने भी सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने और देश के इस बेहतरीन दिमाग को बचाने की अपील की है.
यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है
यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है. सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने की टिप्पणी के बाद युवाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची, जिसके परिणामस्वरूप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का गठन हुआ. देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और उनके सम्मान की इस लड़ाई में सोनम वांगचुक अब अपनी जान की बाजी लगा चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से बातचीत की कोई पहल न होना जमीनी हकीकत को और अधिक दर्दनाक बना रहा है.
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