नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर भयानक रूप से निशाना बनाया जा रहा है. कानून और न्याय के तराजू पर फैसला सुनाने वाली इस महिला न्यायाधीश को सिर्फ इसलिए जान से मारने और सामूहिक बलात्कार की धमकियां मिल रही हैं, क्योंकि उन्होंने धार्मिक कट्टरता के एक मामले में न्याय किया. बीते 12 जून को उन्होंने साल 2022 के एक वीभत्स लिंचिंग मामले में 14 कथित ‘गोरक्षकों’ को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
फैसले को कानूनी नहीं, धार्मिक चश्मे से देख रही कट्टर भीड़
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कोर्ट ने नजीर अहमद नाम के व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या करने वाले आरोपियों को कानूनन सख्त सजा दी. फैसले के आते ही दोषियों के परिवारों ने कोर्ट परिसर के बाहर हंगामा किया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर एक जहरीले सांप्रदायिक अभियान में बदल गया.
कट्टरपंथी संगठनों और दक्षिणपंथी विचारकों ने इस न्यायिक फैसले की कानूनी कमियों पर बहस करने के बजाय, न्यायाधीश की मुस्लिम पहचान को मुख्य निशाना बनाया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में खुलेआम यह नैरेटिव चलाया जा रहा है कि एक मुस्लिम जज होने के नाते उन्होंने जानबूझकर हिंदुओं को सजा दी है.
देशव्यापी ‘खून-खराबे’ की खुली चुनौती
धार्मिक उन्माद का आलम यह है कि सोशल मीडिया पर खुले चेहरे के साथ लोग वीडियो डालकर धमकी दे रहे हैं कि यदि दोषियों को 10 दिनों के भीतर जेल से रिहा नहीं किया गया, तो देश भर में “खून-खराबा” किया जाएगा. हद तो तब हो गई जब पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वयंभू गोरक्षा संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए न्याय की कुर्सी पर बैठी न्यायाधीश तबस्सुम खान के पुतले तक फूंक दिए.
कट्टरता के खिलाफ एकजुट हुई न्यायपालिका
इस अभूतपूर्व हमले ने पूरी न्यायिक बिरादरी को हिलाकर रख दिया है. पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्यायाधीश की धार्मिक पहचान को आधार बनाकर फैसले की वैधता पर सवाल उठाना न्याय की अवधारणा को पूरी तरह उलट देना है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि अगर न्यायाधीशों को इस तरह डराया जाएगा, तो देश में निष्पक्ष न्याय व्यवस्था का बचना असंभव हो जाएगा.
सुरक्षा और कार्रवाई
मामले की गंभीरता और बढ़ते खतरे को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सुरक्षा रिपोर्ट तलब की है. पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि साइबर सेल भड़काऊ वीडियो बनाने वालों की तलाश कर रही है. फिलहाल जज तबस्सुम खान को भारी पुलिस सुरक्षा घेरे में रखा गया है.
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