- NCLAT में CoC के गठन पर सुनवाई से पहले RP ने वेदांता के अधिग्रहण को मान्यता देते हुए भुगतान का किया दावा
- 24 माह का अंतिम वेतन ही होगा भुगतान का आधार, ऑनरोल कर्मचारियों की सेवा निरंतर करने की योजना नहीं !
जमशेदपुर. केबुल कंपनी (INCAB Industries Limited) के कर्मचारियों और मजदूरों के बकाये भुगतान को लेकर एक बार फिर असमंजस और ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई है. समाधान पेशेवर (RP) और मॉनिटरिंग कमेटी के अंतरिम प्रबंधक पंकज कुमार टिबरेवाल के नाम से एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
इस पत्र में केबुल कर्मियों के बकाये के निपटान और लगभग 45 करोड़ रुपये जारी किए जाने का दावा किया गया है, साथ ही इसके भुगतान का पूरा फॉर्मूला (Calculation Formula) भी साझा किया गया है. इसके अनुसार बकाया का भुगतान अंतिम दो साल की सेवा के वेतन के आधार की गणना पर किया जायेगा. इस पत्र में ऑनरोल कर्मचारियों की सेवा भी कुछ नहीं कहा गया है.
हालांकि इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि इस जारी पत्र में न तो कोई पत्रांक संख्या (Ref No.) दर्ज है और न ही पत्र जारी करने की कोई तिथि (Date) अंकित है. इस बड़ी तकनीकी और कानूनी खामी के कारण केबुल कर्मियों और आंदोलित मजदूरों के बीच गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है कि कहीं यह उनके साथ एक नया मानसिक खिलवाड़ या गुमराह करने की साजिश तो नहीं है.
1. वायरल पत्र में क्या-क्या दिए गए हैं ब्योरे और भुगतान का फॉर्मूला?
सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने इस पत्र में कंपनी के अधिग्रहण और कर्मचारियों के बकाये के निपटान को लेकर निम्नलिखित मुख्य बातें और भुगतान का गणित (फॉर्मूला) बताया गया है:
- वेदांता लिमिटेड का अधिग्रहण: पत्र के अनुसार, NCLT द्वारा स्वीकृत समाधान योजना के तहत वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) ने 3 दिसंबर 2025 से INCAB इंडस्ट्रीज लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया है.
- लगभग ₹45 करोड़ का भुगतान: कर्मचारियों के बकाये के रूप में कुल लगभग 45 करोड़ रुपये जारी किए जाने का दावा किया गया है, जिसके तीन मुख्य हिस्से और भुगतान का फॉर्मूला इस प्रकार है:
- ग्रेच्युटी भुगतान: स्वीकृत ग्रेच्युटी दावों का पूर्ण भुगतान (Paid in full) किया गया है.
- वेतन संबंधी बकाया (Salary Dues): IBC की धारा 53 और NCLT कोलकाता के आदेश के तहत CIRP शुरू होने की तिथि (7 अगस्त 2019) से ठीक पहले के आखिरी 24 महीनों के वेतन/मजदूरी दावों का निपटान किया गया है. इसका फॉर्मूला है: [24 महीने का स्वीकृत वेतन क्लेम × SECURED FCs का लागू प्रतिशत (लगभग 35%)].
- वेदांता का अतिरिक्त योगदान (Additional Contribution): वैधानिक आवश्यकताओं से परे जाकर, वेदांता और CoC द्वारा सभी कर्मचारियों के लिए स्वेच्छा से 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि निर्धारित की गई है. इसका वितरण फॉर्मूला है: [शेष बचे हुए कुल क्लेम (Total Admitted Claim – ग्रेच्युटी और 24 महीने के वेतन भुगतान) का अनुपात × वेदांता के 15 करोड़ का लगभग 9%].
- लंबित मामले और ईमेल: पत्र में अंत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सही बैंक विवरण न मिलने के कारण कुछ मामले लंबित हैं, जिन्हें सत्यापन के बाद चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा. साथ ही, पूछताछ के लिए एक ईमेल आईडी (incabdistributionqueries@gmail.com) भी साझा की गई है.
2. बिना डेट और पत्रांक के पत्र पर क्यों गहरा रहा है संदेह?
भले ही पत्र में भुगतानों का एक बड़ा और आकर्षक ब्योरा तथा गणितीय फॉर्मूला पेश किया गया हो, लेकिन मजदूरों और कर्मचारियों के बीच इसे लेकर भारी अविश्वास बना हुआ है. संदेह के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- पत्रांक और तिथि का पूरी तरह गायब होना: किसी भी कॉरपोरेट, कानूनी या आधिकारिक पत्र की प्रमाणिकता उसकी तारीख और संदर्भ संख्या (Ref No.) से होती है. इस पत्र में दोनों का ही नामोनिशान न होना इसे सीधे तौर पर ‘संदिग्ध’ श्रेणी में खड़ा करता है.
- आधिकारिक माध्यमों की बजाय सोशल मीडिया पर तैरना: मजदूरों तक इस तरह के महत्वपूर्ण दस्तावेज का केवल व्हाट्सएप या फेसबुक के जरिए पहुंचना, बिना किसी विधिवत घोषणा के, कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है.
- मजदूरों का गुस्सा और अविश्वास: केबुल कंपनी के कर्मचारी अपने हक और बकाए के लिए वर्षों से आंदोलित और संघर्षरत रहे हैं. ऐसे में बिना किसी पुख्ता मुहर या डेट के अचानक सामने आए इस पत्र को मजदूरों ने उनके जख्मों पर नमक छिड़कने और आंदोलन को भटकाने की एक और कोशिश करार दिया है.
आरपी के नाम से जारी इस ब्योरे और भुगतान के फॉर्मूले ने एक तरफ जहां लंबे समय से अटके बकाये की उम्मीद जगाई है, वहीं दूसरी तरफ दिनांक और पत्रांक का अता-पता न होना इस पर बड़ा ग्रहण लगा रहा है. अब देखना होगा कि प्रबंधन के स्तर पर इस वायरल पत्र की सत्यता पर क्या रुख अपनाया जाता है, ताकि सच और अफवाह के बीच पिस रहे मजदूरों का भ्रम दूर हो सके.
वायरल (RP) पंकज कुमार टिबरेवाल का पत्र






