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Home » BIHAR : 1908 के बाद की जमीन रजिस्ट्री अब ऑनलाइन होगी उपलब्ध, जानें डाउनलोड करने के नियम
बिहार

BIHAR : 1908 के बाद की जमीन रजिस्ट्री अब ऑनलाइन होगी उपलब्ध, जानें डाउनलोड करने के नियम

Ocean News DeskBy Ocean News DeskJuly 22, 2026
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सांकेतिक तस्वीर
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  • बड़ी डिजिटल पहल: बिहार में जमीन के निबंधन (रजिस्ट्री) दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन कार्य तेजी से जारी.

  • 1908 से अब तक के दस्तावेज: रैयत अब दादा-परदादा के ज़माने (1908 से 1989 तक) के ऐतिहासिक कागजात भी ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे.

  • दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति: अब ऑफलाइन फॉर्म भरने, ₹100 का शुल्क देने और रजिस्ट्री ऑफिस जाने की झंझट खत्म.

  • पूर्ण कानूनी मान्यता: पोर्टल से डाउनलोड किए गए डिजिटल दस्तावेज सभी सरकारी और कानूनी कार्यों में पूरी तरह मान्य होंगे.

पटना. बिहार के जमीन मालिकों (रैयतों) के लिए एक राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. अब जमीन की रजिस्ट्री या पुराने दस्तावेजों की नकल पाने के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. राज्य सरकार के निर्देश पर निबंधन विभाग (Registration Department) पुराने से पुराने दस्तावेजों का तेजी से डिजिटाइजेशन कर रहा है. इसके बाद रैयत घर बैठे ही अपने मोबाइल या कंप्यूटर से जमीन के निबंधन दस्तावेज डाउनलोड कर उसका प्रिंट निकाल सकेंगे.

दो चरणों में हो रहा है डिजिटाइजेशन, जानें पूरी योजना

राज्य भर में दस्तावेजों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने का काम दो अलग-अलग चरणों (Phases) में चलाया जा रहा है:

पहला फेज (1990 से 1995)

निबंधन कार्यालय के अनुसार, पहले चरण में वर्ष 1990 से 1995 तक के दस्तावेजों को डिजिटाइज किया जा रहा है. अकेले मुजफ्फरपुर जिले में ही इस अवधि के लगभग 1 लाख 70 हजार दस्तावेजों की स्कैनिंग और मिलान का काम अंतिम चरण में है. इसे जल्द ही पोर्टल पर लाइव कर दिया जाएगा.

दूसरा फेज (1908 से 1989)

दूसरे चरण में वर्ष 1908 से 1989 तक के ब्रिटिश कालीन और ऐतिहासिक कागजातों को स्कैन कर अपलोड किया जाएगा. यह काम काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसके पूरा होते ही लोगों को अपने दादा-परदादा के जमाने के जमीन रिकॉर्ड्स चुटकियों में ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएंगे.

समय और पैसे की बचत, खत्म होगी बिचौलिया संस्कृति

अब तक किसी भी जमीन की केवाला या रजिस्ट्री की नकल (Certified Copy) निकालने के लिए लोगों को जिला निबंधन कार्यालय जाना पड़ता था. इसके लिए ऑफलाइन आवेदन देने के साथ ₹100 का शुल्क और समय दोनों बर्बाद होता था. कई बार लोगों को बिचौलियों के चक्कर में भी फंसना पड़ता था.

डिजिटल व्यवस्था लागू होने से:

  • आम जनता का समय और पैसा दोनों बचेगा.
  • घर बैठे एक क्लिक पर दस्तावेज उपलब्ध होंगे.
  • जमीन संबंधी फर्जीवाड़े और विवादों में कमी आएगी.

एजेसियों द्वारा स्कैनिंग के बाद मूल दस्तावेजों से मिलान किया जा रहा है ताकि ऑनलाइन अपलोड होने वाले आंकड़ों में कोई त्रुटि न रहे.

निष्कर्ष: पारदर्शी व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

बिहार सरकार का यह कदम राज्य में राजस्व एवं भूमि सुधार व्यवस्था को पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. पुराने अभिलेखों के डिजिटल हो जाने से न केवल आम रैयतों को सहूलियत होगी, बल्कि न्यायालयों और प्रशासनिक कार्यों में जमीन संबंधी विवादों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा.

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