नई दिल्ली. देश में एथनॉल ब्लेंडिंग (पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण) को लेकर जारी चिंताओं और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने संसद में अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि देशभर में E20 ईंधन (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) पर चल रहे 23 करोड़ से अधिक वाहनों में इंजन खराब होने का कोई भी प्रमाणित साक्ष्य नहीं मिला है. सरकार ने साफ किया है कि इंटरनेट पर जताई जा रही आशंकाओं की वैज्ञानिक रूप से जांच की गई है और वे निराधार हैं.
23 करोड़ वाहनों का इंजन सुरक्षित, सर्विस डेटा ने दी क्लीन चिट
केंद्रीय मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश में लगभग 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन पिछले साढ़े तीन साल से और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें पिछले ढाई साल से E15-प्लस और E19-E20 ईंधन पर सुचारू रूप से चल रही हैं. इनमें बड़ी संख्या में ऐसी पुरानी गाड़ियां भी शामिल हैं जो E20 ईंधन आने से पहले बनी थीं.
सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर की एक बड़ी चार-पहिया वाहन निर्माता कंपनी के वर्ष 2025-26 के सर्विस डेटा का हवाला दिया, जिसमें 2.84 करोड़ वाहन शामिल थे. इस व्यापक डेटा में ईंधन से जुड़ा कोई भी नुकसान या खराबी दर्ज नहीं की गई है. दो-पहिया वाहन निर्माताओं ने भी इसी तरह के सकारात्मक आंकड़े साझा किए हैं.
एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर अभी फैसला नहीं
संसद में यह भी साफ किया गया कि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) बढ़ाने पर कोई निर्णय नहीं लिया है. सरकार का कहना है कि भविष्य में इससे अधिक मिश्रण का कोई भी कदम पूरी तरह से वैज्ञानिक व तकनीकी अध्ययन और ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) तथा शोध संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद ही चरणबद्ध तरीके से उठाया जाएगा.
विदेशी मुद्रा की भारी बचत और महंगाई पर असर
एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के फायदों को रेखांकित करते हुए मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014-15 से अब तक इस नीति के कारण विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी बचत हुई है. इसके अलावा, लगभग 316 लाख टन कच्चे तेल की खपत कम हुई है और करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है.
इस कार्यक्रम से देश के किसानों को भी 1.66 लाख करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष कमाई हुई है. सरकार ने स्पष्ट किया कि एथनॉल बनाने के लिए केवल अधिशेष (सरप्लस) अनाज का उपयोग किया जाता है, जिससे देश में चीनी और चावल की खुदरा महंगाई पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है.
बिना-ब्लेंड वाले पेट्रोल पर रोक, समानांतर सप्लाई चेन संभव नहीं
चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर बिना मिलावट (बिना-ब्लेंड) वाला सादा पेट्रोल अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग को सरकार ने खारिज कर दिया है. सरकार का तर्क है कि बिना-ब्लेंड वाले पेट्रोल के लिए एक अलग और समानांतर सप्लाई चेन चलाने से परिचालन लागत (Logistics Cost) बहुत अधिक बढ़ जाएगी. ऐसा करने से इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम से पर्यावरण और किसानों की आय को होने वाले आर्थिक लाभ काफी कम हो जाएंगे.
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