नई दिल्ली. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक महत्वपूर्ण अधिसूचना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति भवन द्वारा शनिवार देर रात जारी बयान के अनुसार, यह नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी. 62 वर्षीय दिनेश शर्मा की इस नियुक्ति को राजनीतिक हलकों में एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है.
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक सफर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले डॉ. दिनेश शर्मा का राजनीतिक और शैक्षणिक जीवन काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है. राजनीति में आने से पहले वे लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. सांगठनिक मोर्चे पर वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इसके अलावा, वे गुजरात के पार्टी प्रभारी रहने के साथ-साथ हरियाणा में मुख्यमंत्री और राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक की भूमिका भी निभा चुके हैं. वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
लगातार दो बार रहे लखनऊ के महापौर
स्थानीय राजनीति की बात करें तो डॉ. दिनेश शर्मा वर्ष 2006 से मार्च 2018 तक लगातार दो बार लखनऊ के महापौर (मेयर) रहे. इस दौरान वे उत्तर प्रदेश मेयर काउंसिल के भी अध्यक्ष (2007 से मार्च 2018 तक) रहे. अपनी प्रशासनिक क्षमताओं के बल पर उन्होंने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई. वर्ष 2017 में जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, तो उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया. अपने पहले उपमुख्यमंत्री कार्यकाल (2017-2022) के दौरान उन्होंने माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली थी.
संसद में सक्रिय भूमिका और राज्यसभा का कार्यकाल
वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव न लड़ने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया. वे तब से राज्यसभा सांसद के रूप में देश के उच्च सदन में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उनका राज्यसभा का कार्यकाल इसी वर्ष 25 नवंबर को समाप्त होने वाला था. संसद में अपने कार्यकाल के दौरान वे राज्यसभा के उप-सभापति की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. इसके अलावा, वे संसद की राजभाषा समिति के एक प्रमुख सदस्य के रूप में कार्यरत थे और इसकी पहली उप-समिति के संयोजक की भूमिका निभा रहे थे, जो सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग की प्रगति की समीक्षा करती है.
रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह नियुक्ति?
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वर्तमान में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ‘ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना’ जैसी बेहद महत्वाकांक्षी और विशाल मेगा परियोजना पर काम कर रही है. नीति आयोग द्वारा परिकल्पित इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 81,000 करोड़ से 92,000 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है, जिसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है. जानकारों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद भारत को सामरिक और रणनीतिक रूप से चीन के मुकाबले एक बड़ी बढ़त हासिल होगी. ऐसे में, एक अनुभवी राजनेता और प्रशासक के तौर पर डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त किया जाना बेहद अहम माना जा रहा है.




