- सदर अस्पताल में संचालित 100 बेड के फेब्रिकेटेड अस्पताल की दे दी ऑपरेशनल जिम्मेदारी
- महिला डॉक्टर से ड्यूटी रोस्टर को लेकर दुर्व्यवहार, मामला ऊपर तक ले जाने की चेतावनी
JAMSHEDPUR. सदर अस्पताल जमशेदपुर में स्वास्थ्य सेवा का बदरंग नमूना सामने आया है. यह झारखंड का इकलौता अस्पताल है, जहां दो दो उपाधीक्षक तथा दो हॉस्पिटल मैनेजर हैं. इसमें बड़ी बात यह सामने आयी है कि सिविल सर्जन ने अपने चापलूस एक कंप्यूटर सहायक को हॉस्पिटल का मैनेजर बना दिया है! कंप्यूटर सहायक को 100 बेड वाले सदर अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है जिसका न तो उसे अनुभव है न ही योग्यता. सिविल सर्जन ने बकायदा आदेश जारी कर आरसीएच कार्यालय में पदस्थापित कंप्यूटर सहायक विमल कुमार मंडल को हॉस्पीटल का ऑपरेशन इंचार्ज बनाया है.
मनमानी से तंग आकर अस्पताल उपाधीक्षक ने छोड़ा पद
सिविल सर्जन से शह मिलने के बाद कम्प्यूटर सहायक विमल मंडल वर्तमान की मनमानी चल रही है. वह डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर भी बनाता है और डॉक्टरों को आदेश भी देता है. आलम यह है कि इसके दुर्व्यवहार से आहत होकर उपाधीक्षक डॉ कमलेश प्रसाद ने सदर अस्पताल उपाधीक्षक का पद तक छोड़ दिया. यह बात सिविल सर्जन तक भी पहुंची लेकिन वह मौन रहे. अब इस मामले को स्थानीय कर्मचारी मंत्री और सरकार तक पहुंचाने की तैयारी में जुटे हुए है.
सूत्रों ने बताया कि बीते दिनों विमल कुमार मंडल ने एक महिला डॉक्टर से ड्यूटी रोस्टर को लेकर बदसलूकी की. यह मामला तूल पकड़ने लगा है. महिला डॉक्टर ने मामले को ऊपर तक ले जाने की चेतावनी दी है. सूत्रों का कहना है कि कंप्यूटर सहायक के रूप में पदस्थापित विमल मंडल सरकारी सेवा में कार्यरत पत्नी के नाम पर कंपनी बनाकर सिविल सर्जन ऑफिस तथा सदर अस्पताल एवं पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विभिन्न सामानों एवं सामग्रियों का सप्लायर तक बन गया है. (विस्तृत खबर अगली कड़ी में)
जमशेदपुर सदर अस्पताल में पहले से ही हॉस्पीटल मैनेजर पदस्थापित है, ऐसे में एक कंप्यूटर सहायक को हॉस्पीटल का ऑपरेशन इंचार्ज बनाये जाने को लेकर सवाल उठाये जा रहे है. कर्मचारियों का कहना है कि खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले सिविल सर्जन की पदस्थापना के बाद से ही यह तंत्र स्वास्थ्य सेवाओं को दीमक की तरह खोखला कर रहा है. यह तंत्र आम जनता और कर्मचारियों के शोषण का कारण बन रहा है. यह बीते दिनों दिनों ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी दिखायी पड़ा था.
सिविल सर्जन के चहेते कंप्यूटर सहायक विमल कुमार मंडल के कार्य व्यवहार को सदर अस्पताल के कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ने लगा है. लोग सवाल यह उठा रहे है कि मंत्री का नजदीकी बताकर सिविल सर्जन अब ऐसे फैसले ले रहे जो सरकार के नीतिगत निर्णयों से भी मेल नहीं खाते. कहा जा रहा है कि सरकार ने हास्पीटल मैनेजर के लिए निर्धारित योग्यता और अनुभव तय कर रखा है. उसके अनुसार ही वेतन और दूसरी सुविधाएं भी देय होती है लेकिन विमल कुमार मंडल को वह कार्य दे दिया गया है जिसका उसे न तो अनुभव है न ही योग्यता. अब सदर अस्पताल में पहले से एक हाॅस्पीटल मैनेजर पदस्थापित हैं और उस पर सरकार भारी-भरकम खर्च भी कर रही है, उसके बाद बिना किसी सरकारी गाइड लाइन के ही 100 बेड वाले अस्पताल की पूरी व्यवस्था किस अनुभव पर कंप्यूटर सहायक को सौंप दी गयी है !
क्रमश : अगली कड़ी में जाने
- ANM पत्नी के नाम पर कंपनी बनाकर अस्पताल से आर्डर निकालते हैं कंप्यूटर सहायक

