जमशेदपुर. जमशेदपुर महानगर में मंडल अध्यक्षों के चयन के बाद भाजपा (BJP) में सांगठनिक खींचतान और असंतोष का अब तक भीतर ही भीतर सुलग रहा ज्वालामुखी फूटने के कगार पर है. शहर के आधा दर्जन प्रमुख मंडलों बागबेड़ा, घाघीडीह, परसुडीह, कदमा, पारडीह और बिरसानगर, में नए मंडल अध्यक्षों की घोषणा के बाद से ही बगावत के सुर बुलंद हैं.
विरोध का मुख्य कारण सांगठनिक ढांचे में अचानक किया गया फेरबदल, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और महीनों बीत जाने के बाद भी पूर्ण कमेटियों का गठन न हो पाना बताया जा रहा है.
इस गहराते राजनीतिक संकट और गुटबाजी को समाप्त करने के लिए अब पार्टी के सबसे कद्दावर चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को ‘डैमेज कंट्रोल’ की कमान सौंपी गई है. रघुवर दास 23 जुलाई को भालूबासा में एक महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक करने जा रहे हैं, जहां वे असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे मुखातिब होंगे.
बगावत की मुख्य वजहें, कार्यकर्ताओं के आक्रोश का विश्लेषण
1. सांगठनिक कमेटियों का अटकाव व निष्ठावानों की उपेक्षा
पार्टी में अंदरूनी कलह का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह है कि अब तक मंडलों में पूर्ण कमेटियों की घोषणा नहीं हो सकी है. वर्षों से पार्टी का झंडा ढोने वाले, आंदोलनों में लाठियां खाने वाले और बूथ स्तर पर पसीना बहाने वाले मूल कार्यकर्ता आज खुद को ठगा और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
2. ‘बाहरियों’ की एंट्री और वैचारिक समझौता
बिरसानगर जैसे मंडलों में कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस बात को लेकर है कि विपक्षी दलों (JMM व JDU) से आए नेताओं को सीधे संगठन में तरजीह दी जा रही है. पिछले दरवाजे से बाहरी लोगों को संगठन में जगह देने की कोशिश ने सालों से समर्पित होकर काम कर रहे पुराने कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष भर दिया है.
3. जातीय समीकरण और उम्र सीमा का पेंच
बागबेड़ा और परसुडीह जैसे मंडलों में अध्यक्षों के चयन में जातीय संतुलन बिगड़ने और 45 वर्ष की उम्र सीमा के नियम को लेकर भारी असमंजस है. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जातीय संतुलन की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा लोगों को पद बांटे जा रहे हैं, जिससे पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक और जनसमर्थन प्रभावित हो सकता है. वहीं घाघीडीह में चयन में भेदभाव का आरोप है.
समानांतर गुटबाजी और ठप होते सांगठनिक कार्यक्रम
परसुडीह और कदमा जैसे क्षेत्रों में पार्टी दो स्पष्ट फाड़ों में बंटी नजर आ रही है. स्थिति यह है कि मंडल अध्यक्ष द्वारा घोषित कार्यक्रमों के विरोध में असंतुष्ट गुट समानांतर कार्यक्रम आयोजित कर अपनी ताकत दिखा रहा है. हाल के दिनों में जनहित के मुद्दों पर आयोजित विरोध प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति ने पार्टी की कमजोर जमीनी पकड़ को जगजाहीर कर दिया है.
23 जुलाई की बैठक: रघुवर दास के रुख पर टिकी निगाहें
पार्टी के भीतर मचे इस राजनीतिक घमासान पर ब्रेक लगाने के लिए 23 जुलाई को भालूबासा स्थित शीतला मंदिर परिसर में एक मैराथन सांगठनिक बैठक बुलाई गई है.
बैठक की संभावित रणनीति और कड़े फैसले:
असंतोष का निवारण: पूर्व सीएम रघुवर दास, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद और प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी की मौजूदगी में असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के सुर सुने जाएंगे.
अनुशासनहीनता पर सख्त संदेश: गुटबाजी को बढ़ावा देने और समानांतर गतिविधियां चलाने वाले नेताओं को शीर्ष नेतृत्व की ओर से कड़ा संदेश दिए जाने की पूरी संभावना है.
कमेटियों के गठन को हरी झंडी: जिन मंडलों में कमेटियों का गठन रुका हुआ है, वहां जातीय संतुलन और निष्ठावानों को जगह देते हुए सूची को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा.
जमशेदपुर भाजपा के भविष्य की परीक्षा
जमशेदपुर भाजपा के लिए 23 जुलाई की यह बैठक केवल एक सांगठनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है. यदि पूर्व सीएम रघुवर दास कार्यकर्ताओं के भरोसे को बहाल करने और गुटबाजी पर लगाम लगाने में सफल होते हैं, तो भाजपा अपने इस मजबूत गढ़ को बचाए रखने में कामयाब होगी. अन्यथा, सांगठनिक ढांचे में आई यह दरार आगामी राजनीतिक राह को और कठिन बना सकती है.



