तिब्बत के नागकू क्षेत्र में आए शक्तिशाली 7 तीव्रता के भूकंप के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। मुख्य भूकंप के बाद महज़ पांच घंटे के भीतर तीन बार और तेज झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में भारी डर बैठ गया है। इस आपदा का असर केवल तिब्बत तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके झटके भारत, चीन और अफगानिस्तान तक महसूस किए गए।
जान-माल का भारी नुकसान और राहत कार्य
तिब्बत में आए इस विनाशकारी भूकंप के कारण अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि घायलों की संख्या बढ़कर 76 हो गई है। स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और कम से कम 339 घर ढह गए हैं। चीनी प्रशासन और सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। हालांकि, अत्यधिक ठंड और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नागकू शहर में हर घर और गांव की तलाशी के लिए 5,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है।
5 घंटे में तीन बार आए आफ्टरशॉक्स
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद आए इन तीन नए झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0, 4.6 और 4.5 दर्ज की गई। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि इस शक्तिशाली भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स आ चुके हैं, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (रॉकस्लाइड) और इमारतों के मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश चुनौतीपूर्ण हो गई है। जनवरी 2024 के बाद से तिब्बत में यह सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है।
भारत और पड़ोसी देशों में भी कांपी धरती
इस आपदा का प्रभाव भारत के कई हिस्सों में भी देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर के डोडा और किस्तवाड़ के साथ-साथ कर्नाटक के चिक्कबल्लपुर में भी हल्के झटके महसूस किए गए, हालांकि गनीमत यह रही कि भारत के इन क्षेत्रों में तीव्रता काफी कम (2.4 से 2.9 के बीच) थी, जिससे किसी नुकसान की खबर नहीं है। इसके अलावा, चीन और अफगानिस्तान में भी सुबह के वक्त भूकंप के झटके दर्ज किए गए। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर राहत व पुनर्वास कार्य जारी है।


