नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित व्यावसायिक घरानों में शुमार टाटा समूह (Tata Group) की पारंपरिक विरासत, स्वामित्व व्यवस्था और सामाजिक परोपकार की संस्कृति को संरक्षित रखने को लेकर देश-विदेश के छह प्रमुख पारसी संगठन एकजुट हो गए हैं। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर टाटा संस के भविष्य, उसकी शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई है। संगठनों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि टाटा समूह की अनूठी विरासत को बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
पारंपरिक स्वामित्व व्यवस्था बचाने की गुहार
पत्र भेजने वाले इन छह प्रमुख पारसी संगठनों का मुख्य उद्देश्य टाटा समूह की उस ऐतिहासिक पहचान को बचाना है, जो दशकों से समाज कल्याण के कार्यों से जुड़ी रही है। संगठनों का कहना है कि टाटा संस की मौजूदा स्वामित्व संरचना में टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इसी व्यवस्था के कारण समूह ने केवल व्यावसायिक लाभ कमाने के बजाय दीर्घकालिक उद्देश्यों और समाजसेवा पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। संगठनों ने आगाह किया है कि इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार के बड़े बदलाव का प्रभाव केवल दो शेयरधारकों के बीच का मामला नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देगा।
परोपकार और समाजसेवा की अनूठी परंपरा
पारसी संगठनों का मानना है कि टाटा समूह की पहचान सिर्फ एक बड़े कॉर्पोरेट घराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के औद्योगिक और सामाजिक विकास की रीढ़ है। टाटा समूह ने इतिहास से लेकर वर्तमान तक शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा और जरूरतमंदों की मदद जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान दिया है। संगठनों का विशेष जोर इस बात पर है कि समूह की कामकाज की पारंपरिक शैली और मालिकाना हक सुरक्षित रहना चाहिए, ताकि आने वाले समय में भी परोपकार की यह महान परंपरा बिना किसी बाधा के आगे बढ़ती रहे।
आरबीआइ के रुख और सूचीबद्धता की चर्चा
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और मुख्य निवेश कंपनियों के नियामकीय अनुपालन को लेकर नियमों को सख्त किया जा रहा है। पिछले दिनों आरबीआई ने टाटा संस की उस अर्जी को खारिज कर दिया था जिसमें एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने की बात कही गई थी। इस फैसले के बाद से ही टाटा संस की नियामकीय स्थिति और शेयर बाजार में इसके संभावित आईपीओ (Listing) को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।
व्यापारिक जगत की निगाहें
फिलहाल, टाटा संस की सूचीबद्धता और उसके भविष्य के स्वामित्व ढांचे को लेकर कॉर्पोरेट जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज है। पारसी संगठनों की इस अपील ने इस पूरे विवाद में केवल व्यावसायिक लाभ या मुनाफे के गणित को पीछे छोड़ते हुए टाटा समूह के ऐतिहासिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार और संबंधित पक्ष इस संवेदनशील मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।


