नई दिल्ली.
खेल की दुनिया से झारखंड और पूरे देश के लिए एक बेहद गर्व और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। जापान के आइची-नागोया शहर में आयोजित 5वें पैरा एशियाई खेलों (Para Asian Games) में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा से ताल्लुक रखने वाले प्रतिभावान तीरंदाज विजय सुंडी (Vijay Sundi) ने देश का परचम लहरा दिया है। विजय सुंडी ने पुरुष रिकर्व युगल (Men’s Recurve Doubles) स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) अपने नाम किया है। इस बड़ी उपलब्धि से न केवल उनके गृह जिले चाईबासा बल्कि पूरे झारखंड राज्य और देश भर के खेल प्रेमियों में जश्न का माहौल है।
हरविंदर सिंह के साथ बनाई विजयी जोड़ी
इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में विजय सुंडी ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हरियाणा के जाने-माने और अनुभवी पैरा तीरंदाज हरविंदर सिंह (Harvinder Singh) के साथ जोड़ी बनाई थी। दोनों खिलाड़ियों के बीच मैदान पर गजब का तालमेल और अद्भुत एकाग्रता देखने को मिली। मुकाबले की शुरुआत से ही इस भारतीय जोड़ी ने अपने शानदार और अचूक निशानों से विपक्षी खिलाड़ियों पर कड़ा दबाव बनाए रखा। अंततः अपनी बेहतरीन तकनीक और मानसिक दृढ़ता के दम पर उन्होंने इस रोमांचक खिताबी मुकाबले को अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक पक्का किया।
ग्रामीण परिवेश से वैश्विक मंच तक का संघर्षमय सफर
विजय सुंडी की यह सफलता किसी परीकथा से कम नहीं है। एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना यह साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों और लगन सच्ची हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। विजय ने अपनी जिंदगी में कई विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन तीरंदाजी के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उनकी यह कड़ी मेहनत और त्याग आखिरकार रंग लाई और उन्होंने वैश्विक मंच पर तिरंगे को ऊंचा कर दिया।
परिवार और शहर में जश्न, भव्य स्वागत की तैयारियां
विजय सुंडी के स्वर्ण पदक जीतने की खबर जैसे ही उनके पैतृक आवास और चाईबासा शहर तक पहुंची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। स्थानीय खेल प्रेमियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और जिला प्रशासन ने भी युवा तीरंदाज की इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व जताया है। विजय के झारखंड वापस लौटने पर उनके भव्य स्वागत की जोरदार तैयारियां की जा रही हैं।
पैरा स्पोर्ट्स के इतिहास में नया सुनहरा अध्याय
विजय सुंडी की इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय पैरा स्पोर्ट्स के इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में झारखंड और देश के अन्य उभरते हुए युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। यह साबित करती है कि शारीरिक चुनौतियों या विपरीत हालातों के बावजूद यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो दुनिया के किसी भी कोने में भारत का नाम रोशन किया जा सकता है।


