जमशेदपुर. एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में नशे का अवैध कारोबार लगातार पैर पसार रहा है, और पुलिस महकमा इस पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। ताजा मामला बिरसानगर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस की तमाम पहरेदारी के दावों की पोल खोलते हुए ब्राउन शुगर की अवैध खरीद-बिक्री का भंडाफोड़ हुआ है।
हालांकि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर तीन युवकों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, लेकिन यह गिरफ्तारी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं और पुलिस की नजरों से बचकर नशे का यह काला कारोबार किस हद तक फल-फूल रहा है।
पुलिस के विशेष अभियान के बावजूद नहीं रुक रही तस्करी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम ने बिरसानगर जोन नंबर तीन स्थित सृष्टि गार्डेन के पास छापेमारी कर तीन युवकों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान रोशन मुंडा उर्फ गुंडा, विकास दास और आकाश दास के रूप में हुई है।
पुलिस ने इनके पास से 5.07 ग्राम ब्राउन शुगर (29 पुड़िया), एक मोबाइल फोन और 1,300 रुपये नकद बरामद किए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि ये आरोपी आदित्यपुर से बड़े पैमाने पर ब्राउन शुगर लाकर बिरसानगर और आसपास के इलाकों में खुलेआम सप्लाई करते थे।
पुराना आपराधिक इतिहास और पुलिस की सुस्ती
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब ये तीनों आरोपी पहले भी चोरी और मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री जैसे संगीन मामलों में जेल जा चुके हैं, तो रिहाई के बाद वे दोबारा शहर में इस अवैध धंधे को कैसे अंजाम दे रहे थे? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस की लचर गश्त और खुफिया तंत्र की नाकामी के कारण ही अपराधियों को खुला संरक्षण मिल रहा है।
त्योहारी सीजन के दौरान जब सुरक्षा कड़ी होनी चाहिए, तब शहर के युवाओं को नशे के दलदल में धकेला जा रहा है। आदित्यपुर से नशा लाकर जमशेदपुर के स्थानीय इलाकों में खपाना यह साबित करता है कि तस्करों का नेटवर्क कितना मजबूत है और पुलिस की पकड़ से वे कितने बेखौफ हैं।
युवा पीढ़ी का भविष्य दांव पर
शहर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस यदि समय रहते सख्त कदम उठाती, तो युवा पीढ़ी इस तरह नशे की गिरफ्त में नहीं आती। केवल औपचारिकता के लिए की गई इक्का-दुक्का छापेमारी से नशे के इस अवैध साम्राज्य को खत्म नहीं किया जा सकता। जब तक इस सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं और बड़े सौदागरों तक पुलिस नहीं पहुंचती, तब तक इस तरह की गिरफ्तारियों का कोई खास असर नहीं दिखने वाला है।
जमशेदपुर पुलिस के लिए यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। यदि अब भी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के इस अवैध कारोबार पर कड़ा शिकंजा नहीं कसा गया, तो आने वाले समय में शहर की कानून-व्यवस्था और खराब हो सकती है। जनता अब कागजी दावों और खानापूर्ति वाली कार्रवाइयों से ऊपर उठकर धरातल पर ठोस परिणाम चाहती है।


