जमशेदपुर. व्यावसायिक जगत में चर्चित रहे पीएंडएम हाईटेक सिटी सेंटर मॉल और टाटा स्टील के बीच चल रहे वित्तीय गतिरोध को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। मॉल प्रबंधन ने टाटा स्टील के लैंड विभाग को बकाया राशि के रूप में 2 करोड़ 23 लाख 86 हजार रुपये का भुगतान कर दिया है। इस बड़े वित्तीय लेनदेन के बाद दोनों पक्षों के बीच लीज रेंट और रोड सेस को लेकर चल रहे पुराने विवाद के सुलझने की उम्मीद बंध गई है। हालांकि, वित्तीय समझौता होने के बावजूद जमीन के सीमांकन और अतिक्रमण से जुड़े कई गंभीर सवाल अभी भी अनसुलझे बने हुए हैं।
वित्तीय वर्ष 2008 से 2015 तक का था बकाया
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टाटा स्टील के लैंड विभाग ने वित्तीय वर्ष 2008-09 से लेकर 2014-15 तक के बकाया लीज रेंट और 25 प्रतिशत रोड सेस के मद में इस राशि की मांग की थी। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण यह मामला तूल पकड़ता जा रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टाटा स्टील की ओर से कड़ा रुख अपनाया गया था और मॉल प्रबंधन को अल्टीमेटम भी जारी किया गया था, जिसके बाद यह पूरा प्रकरण सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गया था।
संयुक्त नापी और अतिक्रमण के मुद्दे पर अब भी संशय
इस वित्तीय विवाद के समानांतर, परिसर की जमीन के सीमांकन और अतिक्रमण का मामला भी काफी चर्चा में रहा है। इससे पहले, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) और टाटा स्टील के लैंड विभाग ने संयुक्त रूप से मॉल परिसर की जमीन की नापी की थी। इस संयुक्त माप-जोख के दौरान परिसर के कुछ हिस्सों को अतिक्रमण की जद में चिह्नित किए जाने की बात सामने आई थी।
यद्यपि मॉल प्रबंधन द्वारा बकाया राशि का भुगतान कर दिए जाने से वित्तीय विवाद का एक बड़ा हिस्सा सुलझ गया है, परंतु जमीन के वास्तविक उपयोग और सीमांकन को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
क्या हैं वे अनसुलझे सवाल?
भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी शहर के प्रबुद्ध वर्ग और संबंधित विभागों के बीच कई सवाल तैर रहे हैं:
- संयुक्त नापी में चिह्नित किए गए हिस्सों का सीमांकन कार्य कब तक पूरा होगा?
- अतिक्रमण के मामलों पर प्रशासन और प्रबंधन द्वारा क्या और किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी?
- संबंधित भूमि के वास्तविक और व्यावसायिक उपयोग को लेकर भविष्य में क्या दिशा-निर्देश तय होंगे?
पीएंडएम हाईटेक सिटी सेंटर मॉल शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शुमार है, इसलिए इस पूरे मामले पर आम जनता के साथ-साथ व्यापारिक जगत की भी पैनी नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल वित्तीय भुगतान के बाद राहत जरूर मिली है, लेकिन ज़मीन के मालिकाना हक, सीमांकन और अतिक्रमण के मामलों पर अंतिम निर्णय आने का अभी भी इंतजार किया जा रहा है।


