झारखंड में अलग राज्य के आंदोलन में योगदान देने वाले दिवंगत सेनानियों के परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने झारखंड आंदोलन के सात दिवंगत आंदोलनकारियों की पत्नियों को ‘सम्मान पेंशन’ का लाभ देने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे चार अलग-अलग जिलों के इन परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय के तहत संबंधित जिलों के उपायुक्तों (डीसी) को विशेष निर्देश दिए गए हैं:
एकमुश्त बकाया भुगतान: आश्रितों को देय बकाया सम्मान पेंशन का भुगतान एकमुश्त (Lump sum) करने को कहा गया है। यह भुगतान संबंधित बजट शीर्ष में फंड की उपलब्धता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।
नियमित पेंशन व्यवस्था: इसके साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि हर महीने की नियमित पेंशन का भुगतान आगामी माह के पहले सप्ताह तक अनिवार्य रूप से कर दिया जाए।
दोहराव पर रोक: प्रशासन को यह भी स्पष्ट रूप से देखना होगा कि किसी भी स्थिति में एक ही आश्रित को दोहरा (Double) पेंशन लाभ न मिले।
किन जिलों और लाभार्थियों को मिलेगा लाभ?
गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस योजना के दायरे में चार प्रमुख जिलों के सात आश्रितों को शामिल किया गया है:
कोडरमा जिला:
अरुण कुमार गोस्वामी की पत्नी – प्रिया देवी
बोकारो जिला:
भोलानाथ महतो की पत्नी – राधा रानी महतो
दूबे मांझी की पत्नी – सोरामुनी देवी
अफजल अंसारी की पत्नी – नूरजहां बीबी
सुरेश कुमार की पत्नी – मीना देवी
हजारीबाग जिला:
रती मांझी की पत्नी – करमी देवी
धनबाद जिला:
नारायण दास की पत्नी – बालिका देवी
किस नियम और संकल्प के तहत मिलेगा लाभ?
इन मामलों में पेंशन की पात्रता और देय तिथि पिछले विभागीय संकल्पों के आधार पर तय की गई है:
विभागीय संकल्प संख्या 1938 (दिनांक 20 अप्रैल 2021): इसके तहत सम्मान पेंशन 20 अप्रैल 2021 अथवा संबंधित आंदोलनकारी की मृत्यु की तिथि (इनमें जो भी बाद की तिथि हो) से देय होगी।
विभागीय संकल्प संख्या 2108 (दिनांक 7 मई 2012): इस पुराने संकल्प के अंतर्गत पूर्व की अवधि के लिए पेंशन 1 अगस्त 2015 या आंदोलनकारी की मृत्यु की तिथि (जो बाद में हो) से देय होगी।
जिला प्रशासन को इन्हीं तय प्रावधानों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच करते हुए भुगतान की पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस कदम से झारखंड आंदोलनकारियों के उन परिवारों को संबल मिलेगा, जो अपने मुख्य सदस्य के निधन के बाद आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे।


